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Deepak Pathak
javaab bhi nahin dete sawaal bhi nahin poochte
javaab bhi nahin dete sawaal bhi nahin poochte | जवाब भी नहीं देते सवाल भी नहीं पूछते
- Deepak Pathak
जवाब
भी
नहीं
देते
सवाल
भी
नहीं
पूछते
कमाल
के
हैं
मेरे
यार
हाल
भी
नहीं
पूछते
- Deepak Pathak
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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यार
भी
राह
की
दीवार
समझते
हैं
मुझे
मैं
समझता
था
मेरे
यार
समझते
हैं
मुझे
Shahid Zaki
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हम
को
यारों
ने
याद
भी
न
रखा
'जौन'
यारों
के
यार
थे
हम
तो
Jaun Elia
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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रुख़्सार
का
दे
शर्त
नहीं
बोसा-ए-लब
से
जो
जी
में
तिरे
आए
सो
दे
यार
मगर
दे
Maatam Fazl Mohammad
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तेरी
ख़ुशियों
का
सबब
यार
कोई
और
है
ना
दोस्ती
मुझ
सेे
है
और
प्यार
कोई
और
है
ना
Ali Zaryoun
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तनक़ीद
न
तक़रार
बड़ी
देर
से
चुप
हैं
हैरत
है
मेरे
यार
बड़ी
देर
से
चुप
हैं
गूँगों
को
तकल्लुक़
के
मवाक़े
हैं
मुयस्सर
हम
माहिर-ए-गुफ़्तार
बड़ी
देर
से
चुप
हैं
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Ahmad Abdullah
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यार
बिछड़कर
तुमने
हँसता
बसता
घर
वीरान
किया
मुझको
भी
आबाद
न
रक्खा
अपना
भी
नुक़्सान
किया
Ali Zaryoun
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तू
उसके
दिल
में
जगह
चाहता
है
यार
जो
शख़्स
किसी
को
देता
नहीं
अपने
साथ
वाली
जगह
Umair Najmi
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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ग़मों
के
और
ख़ुशी
के
अश्क़
हैं
इन
आँखों
में
किसी
के
अश्क़
हैं
रक़म
हैं
हादसों
की
शक़्ल
में
ये
पूरी
इक
सदी
के
अश्क़
हैं
जिधर
भी
ये
नज़र
है
जा
रही
उधर
भी
बस
नदी
के
अश्क़
हैं
बहाना
तुम
मुनासिब
शख़्स
पे
कि
महँगे
ज़िन्दगी
के
अश्क़
हैं
कोई
फिर
याद
आने
लग
गया
ये
बिल्कुल
ही
अभी
के
अश्क़
हैं
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Deepak Pathak
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चार
दिन
लिक्खे
थे
ज़िंदगानी
में
बस
एक
लम्हे
में
और
ज़िन्दगी
बढ़
गई
कुछ
ख़बर
है
तुम्हें
देखने
से
फ़क़त
कितनों
की
आँख
की
रौशनी
बढ़
गई
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Deepak Pathak
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बला
की
ख़ूब-सूरत
इक
कली
से
मुहब्बत
हो
गई
हमको
किसी
से
सभी
थे
याद
करते
काम
से,
सो
किनारा
कर
लिया
हम
ने
सभी
से
लड़ी
थी
इक
दफ़ा
जब
आँख
तुम
से
मैं
तुमको
चाहता
हूँ,
बस
तभी
से
लड़ेंगे
मौत
तुझ
से
आख़िरी
दम
नहीं
हम
हारने
वाले
अभी
से
बताऊँ
क्या
भला
रिश्ता
हमारा
वही
जो
मछली
का
है
हर
नदी
से
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Deepak Pathak
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हर
गली
हर
मोड़
पे
देखा
करेगा
कौन
मुझको
इस
तरह
ढूँढा
करेगा
तेरे
बारे
में
कभी
सोचा
नहीं
था
तू
भी
मेरे
साथ
में
धोका
करेगा
मसअला
तो
बीच
के
हम
दोनों
का
है
तीसरा
फिर
आके
कोई
क्या
करेगा
मैं
सलामत
बच
गया
तो
ध्यान
रखियो
हाल
अपना
देख
तू
रोया
करेगा
सब
उसी
पे
छोड़
दो
आख़िर
में
वो
ही
जो
करेगा
जान
लो
अच्छा
करेगा
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Deepak Pathak
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मेरी
ज़मीं
पे
कोई
और
फ़स्ल
बोने
लगा
ये
आज
कल
तेरी
बाहों
में
कौन
सोने
लगा
निकाह
में
तो
जुदा
होने
की
सहूलत
है
मुहब्बतों
में
भला
कब
तलाक़
होने
लगा
तुम्हारे
बाद
कहीं
लग
गया
मेरा
भी
दिल
बिखर
गए
थे
जो
मोती
उन्हें
पिरोने
लगा
वो
आज
मुझ
सेे
कई
साल
के
यूँँ
बाद
मिला
गले
से
लग
गया
और
लग
के
ख़ूब
रोने
लगा
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Deepak Pathak
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