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Deepak Pathak
chaar din likkhe the zindagaani men bas
chaar din likkhe the zindagaani men bas | चार दिन लिक्खे थे ज़िंदगानी में बस
- Deepak Pathak
चार
दिन
लिक्खे
थे
ज़िंदगानी
में
बस
एक
लम्हे
में
और
ज़िन्दगी
बढ़
गई
कुछ
ख़बर
है
तुम्हें
देखने
से
फ़क़त
कितनों
की
आँख
की
रौशनी
बढ़
गई
- Deepak Pathak
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सफ़र
में
धूप
तो
होगी
जो
चल
सको
तो
चलो
सभी
हैं
भीड़
में
तुम
भी
निकल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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ये
कह
के
दिल
ने
मिरे
हौसले
बढ़ाए
हैं
ग़मों
की
धूप
के
आगे
ख़ुशी
के
साए
हैं
Mahirul Qadri
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ये
करिश्मा
हुआ
चूमने
से
उसे
तीरगी
पर
खुली
रोशनी
की
समझ
Neeraj Neer
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तेरी
यादों
की
धूप
आने
लगी
है
अभी
खुल
जाएगा
मौसम
हमारा
Subhan Asad
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ये
भँवरे
रौशनी
खो
देंगे
अपनी
आँखों
की
अगर
चमन
में
जो
कलियाँ
नक़ाब
ओढेंगी
Shajar Abbas
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मुफ़लिसी
थी
और
हम
थे
घर
के
इकलौते
चराग़
वरना
ऐसी
रौशनी
करते
कि
दुनिया
देखती
Kashif Sayyed
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कुछ
फ़र्क़
क्यूँँ
हो
मुझ
में
जो
रौशन
हुए
हैं
आप
जलता
नहीं
है
चाँद
सितारों
को
देखकर
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Tanoj Dadhich
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मैं
तो
जस्सर
और
भी
रौशन
हुआ
जब
किसी
ने
भी
बुझाया
देर
तक
Avtar Singh Jasser
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कहीं
कोई
चराग़
जलता
है
कुछ
न
कुछ
रौशनी
रहेगी
अभी
Abrar Ahmad
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आसमाँ
अब
ये
कहीं
झुक
तो
नहीं
जाएगा
इक
तेरे
जाने
से
कुछ
रुक
तो
नहीं
जाएगा
Deepak Pathak
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हुस्न
के
तेरे
रंग
हैं
सारे
देख
के
जिन
को
दंग
हैं
सारे
हूबहू
फूलों
में
वही
ख़ुशबू
बाग़
भी
तेरे
अंग
हैं
सारे
लाखों
में
एक
जोगी
होता
है
कहने
को
यूँँ
मलंग
हैं
सारे
बेअदब
मेरी
सारी
बातें
हैं
बेअदब
मेरे
ढंग
हैं
सारे
उसके
हाथों
में
डोर
है
सब
की
और
हम
सब
पतंग
हैं
सारे
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Deepak Pathak
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बस
इक
दिन
के
लिए
कब
ख़ास
रहती
है
उदासी
हम
को
बारह
मास
रहती
है
Deepak Pathak
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पुराने
गीत
चलाओ
तो
कुछ
बात
बने
हमारे
साथ
में
गाओ
तो
कुछ
बात
बने
हमेशा
नाज़
उठाते
हैं
हम
आपके
ही
कभी
हमको
भी
मनाओ
तो
कुछ
बात
बने
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Deepak Pathak
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मेरी
ज़मीं
पे
कोई
और
फ़स्ल
बोने
लगा
ये
आज
कल
तेरी
बाहों
में
कौन
सोने
लगा
निकाह
में
तो
जुदा
होने
की
सहूलत
है
मुहब्बतों
में
भला
कब
तलाक़
होने
लगा
तुम्हारे
बाद
कहीं
लग
गया
मेरा
भी
दिल
बिखर
गए
थे
जो
मोती
उन्हें
पिरोने
लगा
वो
आज
मुझ
सेे
कई
साल
के
यूँँ
बाद
मिला
गले
से
लग
गया
और
लग
के
ख़ूब
रोने
लगा
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Deepak Pathak
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