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Kohar
bahe gham ja rahen aankhoñ sahaare the
bahe gham ja rahen aankhoñ sahaare the | बहे ग़म जा रहें आँखों सहारे थे
- Kohar
बहे
ग़म
जा
रहें
आँखों
सहारे
थे
कभी
जो
अश्क
थे
अब
हैं
महज
पानी
- Kohar
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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ग़म-ए-दुनिया
भी
ग़म-ए-यार
में
शामिल
कर
लो
नश्शा
बढ़ता
है
शराबें
जो
शराबों
में
मिलें
Ahmad Faraz
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आन
के
इस
बीमार
को
देखे
तुझको
भी
तौफ़ीक़
हुई
लब
पर
उसके
नाम
था
तेरा
जब
भी
दर्द
शदीद
हुआ
Ibn E Insha
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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बे-नाम
सा
ये
दर्द
ठहर
क्यूँँ
नहीं
जाता
जो
बीत
गया
है
वो
गुज़र
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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अपनी
तबाहियों
का
मुझे
कोई
ग़म
नहीं
तुम
ने
किसी
के
साथ
मोहब्बत
निभा
तो
दी
Sahir Ludhianvi
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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मुझे
छोड़
दे
मेरे
हाल
पर
तिरा
क्या
भरोसा
है
चारा-गर
ये
तिरी
नवाज़िश-ए-मुख़्तसर
मेरा
दर्द
और
बढ़ा
न
दे
Shakeel Badayuni
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साथ
में
कुछ
जिए
हम
जो
लम्हें
याद
कर
अब
उन्हें
मर
रहा
हूँ
Kohar
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ज़ख़्म
अपनों
से
मिले
है
ग़ैर
पूछे
हाल
मेरा
Kohar
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ज़िक्र
अब
भी
मेरा
किया
होगा
नाम
इक
मरतबा
लिया
होगा
ग़म
उसे
ना
सहें
गए
हो
जब
जाम
पे
जाम
फिर
पिया
होगा
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Kohar
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इश्क़
में
हो
तो
दवा
भी
बे-असर
है
इश्क़
में
तो
लोग
होते
बे-बसर
है
जानते
ही
तो
नहीं
कैसी
बला
है
इसलिए
अंजाम
से
वे
बे-ख़बर
है
छूट
जाए
साथ
तो
सूना
सा
घर
है
साथ
होते
थे,
रहे
तब
बे-कदर
है
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Kohar
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इस-क़दर
मुझ
से
लिपटती
है
तन्हाई
के
मुहब्बत
हो
गई
हो
इस
को
मुझ
से
Kohar
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