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Rohan Hamirpuriya
kaii martaba bol dii baat dil kii
kaii martaba bol dii baat dil kii | कई मर्तबा बोल दी बात दिल की
- Rohan Hamirpuriya
कई
मर्तबा
बोल
दी
बात
दिल
की
बताने
को
फिर
इक
मगर
बात
बाक़ी
- Rohan Hamirpuriya
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ये
अलग
बात
कि
ख़ामोश
खड़े
रहते
हैं
फिर
भी
जो
लोग
बड़े
हैं,
वो
बड़े
रहते
हैं
Rahat Indori
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तुम
मुख़ातिब
भी
हो
क़रीब
भी
हो
तुम
को
देखें
कि
तुम
से
बात
करें
Firaq Gorakhpuri
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तन्हा
होना,
गुमसुम
दिखना,
कुछ
ना
कहना...
ठीक
नहीं
अपने
ग़म
को
इतना
सहना,
इतना
सहना...
ठीक
नहीं
आओ
दिल
की
मिट्टी
में
कुछ
दिल
की
बातें
बो
दें
हम
बारिश
के
मौसम
में
गमले
ख़ाली
रहना...
ठीक
नहीं
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Dev Niranjan
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बात
ऐसी
भी
भला
आप
में
क्या
रक्खी
है
इक
दिवाने
ने
ज़मीं
सर
पे
उठा
रक्खी
है
इत्तिफ़ाक़न
कहीं
मिल
जाए
तो
कहना
उस
सेे
तेरे
शाइर
ने
बड़ी
धूम
मचा
रक्खी
है
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Ismail Raaz
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जो
चुप-चाप
रहती
थी
दीवार
पर
वो
तस्वीर
बातें
बनाने
लगी
Adil Mansuri
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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कू-ब-कू
फैल
गई
बात
शनासाई
की
उस
ने
ख़ुश्बू
की
तरह
मेरी
पज़ीराई
की
Parveen Shakir
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सोच
समझ
कर
देख
लिया
है
क्या
बोलूँ
तुझ
को
तो
हर
बात
बुरी
लग
जाती
है
Sohil Barelvi
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होंटों
पर
इक
बार
सजा
कर
अपने
होंट
उस
के
बाद
न
बातें
करना
सो
जाना
Ateeq Allahabadi
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बूढ़ी
बोझल
सूखी
आँखें
देख
रही
हैं
हैरत
से
कच्ची
उम्र
के
लड़कों
ने
कुछ
ऐसी
बातें
लिक्खी
हैं
Shadab Javed
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तजरबा
है
तो
पता
होगा
इश्क़
का
अंजाम
क्या
होगा
फिर
मुहब्बत
उस
सेे
गर
होगी
ज़ख़्म
फिर
कोई
हरा
होगा
है
मुकरने
का
इरादा
गर
देख
लेना
फिर
बुरा
होगा
पहले
से
था
इल्म
ये
सब
को
राब्ता
उस
सेे
सज़ा
होगा
बिन
पिए
हम
जो
बहकते
हैं
उसकी
आँखों
का
नशा
होगा
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Rohan Hamirpuriya
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अपने
ज़ख़्मों
पे
उसकी
नज़र
चाहिए
यानी
अपनी
दु'आ
का
असर
चाहिए
कैसा
होगा
जुदा
मुझ
सेे
हो
कर
के
वो
उसका
है
हाल
क्या
ये
ख़बर
चाहिए
जो
बचा
ले
मुझे
ग़म
की
हर
धूप
से
ऐसा
माँ
नाम
का
इक
शजर
चाहिए
हो
उसे
नाज़
मेरी
वफ़ा
पर
सदा
आशिक़ी
में
मुझे
ये
हुनर
चाहिए
मैं
भटकता
रहूँ
तन्हा
कब
तक
बता
तेरी
बाहों
में
अपना
बसर
चाहिए
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Rohan Hamirpuriya
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बीस
की
है
वो
बच्ची
नइँ
फिर
भी
इशारा
समझी
नइँ
उस
से
जुदा
हुए
हैं
तो
बज़्म
में
गिनती
होती
नइँ
शहर
बुला
रहा
था
पर
गाँव
की
रेत
छोड़ी
नइँ
कहता
रहा
उतरने
को
हमने
भी
कश्ती
छोड़ी
नइँ
गाँठ
रहेगी
रिश्ते
में
सोच
के
डोर
जोड़ी
नइँ
रोती
रही
वो
रस्ते
भर
बाप
ने
कार
रोकी
नइँ
सारे
जला
दिए
थे
ख़त
याद
की
राख
ढोई
नइँ
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Rohan Hamirpuriya
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गर्मी
दिल्ली
की
सह
नहीं
पाते
बात
करते
हैं
साथ
रहने
की
Rohan Hamirpuriya
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झेले
हैं
जिसकी
ख़ातिर
मुहब्बत
में
हमने
अज़ाब
कहता
फिरता
है
सब
सेे
मुहब्बत
में
क्या
रक्खा
है
Rohan Hamirpuriya
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