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Rohan Hamirpuriya
vo pooch leta agar haal meraa
vo pooch leta agar haal meraa | वो पूछ लेता अगर हाल मेरा
- Rohan Hamirpuriya
वो
पूछ
लेता
अगर
हाल
मेरा
अच्छा
गुज़र
जाता
ये
साल
मेरा
ऐसे
नहीं
वो
नज़र
आने
वाला
बिस्तर
ही
कूचे
में
अब
डाल
मेरा
माज़ी
का
अफ़साना
भूला
नहीं
हूँ
गुज़रा
वो
कल
ही
है
फिलहाल
मेरा
आई
नहीं
रास
तेरी
मुहब्बत
सौदा
ये
बन
बैठा
जंजाल
मेरा
मौका
है
ये
आज़माने
का
उस
को
आगे
का
रस्ता
है
पामाल
मेरा
- Rohan Hamirpuriya
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'फ़ैज़'
थी
राह
सर-ब-सर
मंज़िल
हम
जहाँ
पहुँचे
कामयाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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डर
हम
को
भी
लगता
है
रस्ते
के
सन्नाटे
से
लेकिन
एक
सफ़र
पर
ऐ
दिल
अब
जाना
तो
होगा
Javed Akhtar
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औरों
का
बताया
हुआ
रस्ता
नहीं
चुनते
जो
इश्क़
चुना
करते
हैं,
दुनिया
नहीं
चुनते
Bhaskar Shukla
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दीवार
क्या
गिरी
मिरे
ख़स्ता
मकान
की
लोगों
ने
मेरे
सेहन
में
रस्ते
बना
लिए
Sibt Ali Saba
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हमारे
लोग
अगर
रास्ता
न
पाएँगे
शिलाएँ
जोड़
के
पानी
पे
पुल
बनाएँगे
फिर
एक
बार
मनेगी
अवध
में
दीवाली
फिर
एक
बार
सभी
रौशनी
में
आएँगे
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Amit Jha Rahi
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जब
भी
उस
कूचे
में
जाना
पड़ता
है
ज़ख़्मों
पर
तेज़ाब
लगाना
पड़ता
है
उसके
घर
से
दूर
नहीं
है
मेरा
घर
रस्ते
में
पर
एक
ज़माना
पड़ता
है
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Subhan Asad
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मेरी
जानिब
न
बढ़ना
अब
मोहब्बत
मैं
अब
पहले
से
मुश्किल
रास्ता
हूँ
Liaqat Jafri
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इश्क़
में
धोखा
खाने
वाले
बिल्कुल
भी
मायूस
न
हो
इस
रस्ते
में
थोड़ा
आगे
मयख़ाना
भी
आता
है
Darpan
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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सरफिरे
इक
बात
सुन
ग़म-ज़दा
हालात
सुन
चेहरा
अपना
रख
भी
दे
हो
चुकी
है
रात
सुन
गिर
रहा
ग़म
बूँद
बूँद
हो
रही
बरसात
सुन
बे-ज़बानों
की
दु'आ
ऐ
ख़ुदा
दिन
रात
सुन
मुफ़लिसों
की
बस्ती
है
रंज
के
नग़मात
सुन
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Rohan Hamirpuriya
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शुक्रिया
दोस्त
तेरी
बे-वफ़ाई
का
अब
निखरने
लगी
है
शा'इरी
मेरी
Rohan Hamirpuriya
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करना
चाहा
फ़ना
ज़िंदगी
ने
था
में
रक्खा
मुझे
दोस्ती
ने
दर-ब-दर
फिरता
हूँ
सब
से
कह
कर
छत
दे
रक्खी
है
आवारगी
ने
सहरा
तक
आ
गया
हूँ
तिरे
साथ
मार
डाला
है
लब
तिश्नगी
ने
हँसना
था
और
छुपाने
थे
आँसू
देखा
हँस
कर
के
बेचारगी
ने
बाप
का
कंधा
और
माँ
का
आँचल
ये
सहूलत
दी
है
ज़िंदगी
ने
बद-हवा
सेी
की
ख़ातिर
पी
मय
और
होश
में
रक्खा
संजीदगी
ने
आते-जाते
दिखा
करता
था
जो
डस
लिया
उसको
अफ़सुर्दगी
ने
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Rohan Hamirpuriya
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आहें
भरना
आ
गया
है
प्यार
करना
आ
गया
है
इतनी
खींचा-तानी
में
अब
जीना
मरना
आ
गया
है
जोड़
कर
रक्खा
था
उसने
सो
बिखरना
आ
गया
है
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Rohan Hamirpuriya
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उस
के
कूचे
से
जब
भी
गुज़रते
हैं
ज़ेहन
में
बादल
ग़म
के
उभरते
हैं
काम
न
आती
है
बंदगी
कोई
आशिक़
जब
वादे
से
मुकरते
हैं
उस
के
हुस्न
का
कहना
ही
क्या
यारों
बिखरता
हूँ
मैं
जब
वो
सँवरते
हैं
इन
ख़्वाबों
को
सहेज
तो
लूँ
मगर
टूटे
इक
तो
बाक़ी
बिखरते
हैं
शा'इरी
वो
फ़न
है
यारों
जिस
से
आशिक़ी
के
अंदाज़
निखरते
हैं
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Rohan Hamirpuriya
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