raabta ishq ka is baar mukammal kar doon | राब्ता इश्क़ का इस बार मुकम्मल कर दूॅं

  - Khalid Azad
राब्ताइश्क़काइसबारमुकम्मलकरदूॅं
मेरेपासतुझेछूकेमैंसंदलकरदूॅं
मुझकोशोहरतकीग़ुलामीनहींअच्छीलगती
वरनामैंठहरेहुएपानीमेंहलचलकरदूॅं
हिज्रसेपहलेतोइतनीहीमेरीख़्वाहिशहै
इकनज़रदेखकेउसशख़्सकोपागलकरदूॅं
मेरीख़ुद्दारीनेहरबढ़तेक़दमरोकदिए
वरनाइसटाटकेबिस्तरकोभीमख़मलकरदूॅं
बसयहीसोचकेसहराकीतरफ़लौटाहूँ
क़िस्सा-ए-इश्क़कोफिरसेमैंमुसलसलकरदूॅं
  - Khalid Azad
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