laut ke ab kidhar ko jaayenge | लौट के अब किधर को जाएँगे

  - Khalid Azad
लौटकेअबकिधरकोजाएँगे
ऐनमुमकिनकिघरकोजाएँगे
सिर्फ़सहतानहींयेआईना
संगकुछतोसमरकोजाएँगे
रोकलोअश्कतुमइनआँखोंसे
हमनहींअबसफ़रकोजाएँगे
दिलनहींचाहताकिजाएँहम
गामलेकिनउधरकोजाएँगे
हाएऐसीकशिशहैपानीमें
सबमुसाफ़िरभँवरकोजाएँगे
अबरस्ताकभीभीभूलेंगे
साथलेकेखिज़रकोजाएँगे
  - Khalid Azad
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy