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Khalid Azad
kaii udaas se chehre nazar men rakhta hooñ
kaii udaas se chehre nazar men rakhta hooñ | कई उदास से चेहरे नज़र में रखता हूँ
- Khalid Azad
कई
उदास
से
चेहरे
नज़र
में
रखता
हूँ
फिर
उस
के
बा’द
में
ख़ुद
को
सफ़र
में
रखता
हूँ
किसी
चराग़
किसी
चाँद
का
भरोसा
क्या
दो
चार
जुगनू
भी
वक़्त-ए-सहर
में
रखता
हूँ
मकाँ
बनाया
तो
भूला
नहीं
पुराने
दिन
दो
चार
ख़ाना-बदोशों
को
घर
में
रखता
हूँ
ये
और
बात
की
आँखें
ढकी
ढकी
सी
हैं
ये
एक
बात
मैं
सबको
नज़र
में
रखता
हूँ
- Khalid Azad
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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ख़्वाब
के
आस
पास
रह
रह
कर
थक
गया
हूँ
उदास
रह
रह
कर
Shahbaz Rizvi
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लम्हे
उदास
उदास
फ़ज़ाएं
घुटी
घुटी
दुनिया
अगर
यही
है
तो
दुनिया
से
बच
के
चल
Shakeel Badayuni
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बहुत
उदास
था
उस
दिन
मगर
हुआ
क्या
था
हर
एक
बात
भली
थी
तो
फिर
बुरा
क्या
था
Javed Nasir
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नहीं
है
लब
पे
दिखावे
का
भी
तबस्सुम
अब
हमें
किसी
ने
मुक़म्मल
उदास
कर
दिया
है
Amaan Haider
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मेरे
महबूब
मत
बेचैन
होना
तेरे
क़ासिद
ने
ख़त
पहुँचा
दिया
है
Shajar Abbas
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रोना
नहीं
मुझे
मुझे
रहने
दे
बस
उदास
तू
बैठ
मेरे
पास
मगर
यूँँ
लिपट
नहीं
Swapnil Tiwari
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अब
शहर
की
थकावट
बेचैन
कर
रही
है
अब
शाम
हो
गई
है
चल
माँ
से
बात
कर
लें
Akash Rajpoot
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इसी
खंडर
में
कहीं
कुछ
दिए
हैं
टूटे
हुए
इन्हीं
से
काम
चलाओ
बड़ी
उदास
है
रात
Firaq Gorakhpuri
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जैसे
उदास
करने
मुझे
आई
ईद
हो
तेरे
बगैर
कैसी
मिरी,
माई
ईद
हो
Sayeed Khan
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और
कुछ
रोज़
तेरे
हिज्र
का
मातम
होगा
फिर
तो
ये
दर्द
भी
घट
जाएगा
रफ़्ता
रफ़्ता
Khalid Azad
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ख़ुद
से
मिलने
का
वक़्त
मिल
जाए
तेरे
बारे
में
तब
मैं
सोचूँगा
Khalid Azad
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ढलता
सूरज
हम
को
ये
एहसास
दिलाने
आता
है
हम
कितने
भी
ऊपर
जाएँ
आख़िर
डूब
ही
जाना
है
Khalid Azad
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लोगों
ने
बस
चेहरा
चेहरा
देखा
है
किसने
मुझको
अंदर
मरता
देखा
है
कितनी
उम्मीदों
का
बोझ
वो
सह
पाता
शायद
उसने
डर
से
पंखा
देखा
है
जो
लोगों
के
घर
में
आग
लगाता
है
मैने
उसका
घर
भी
जलता
देखा
है
कल
बाज़ार
में
एक
दिवाना
चीख़
उठा
मैंने
क़ैस
को
ख़ुद
में
ज़िंदा
देखा
है
शायद
तुमको
और
किसी
का
होना
है
मैंने
कल
इक
ख़्वाब
अधूरा
देखा
है
वक़्त
की
फितरत
करवट
लेना
है
अक्सर
शाहों
के
हाथों
में
कासा
देखा
है
सबने
राहें
पकड़ी
अपनी
मंज़िल
की
मैंने
तो
बस
तेरा
रस्ता
देखा
है
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Khalid Azad
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ज़िंदगी
से
गर
हमें
थोड़ी
बहुत
मोहलत
मिली
बैठ
कर
है
सोचना
किस
बात
की
उजरत
मिली
Khalid Azad
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