ishq nuksaan tak nahin pahuncha | इश्क़ नुक़सान तक नहीं पहुँचा

  - Khalid Azad
इश्क़नुक़सानतकनहींपहुँचा
येअभीजानतकनहींपहुँचा
एकमुद्दतसेघरकीजानिबहूँ
फिरभीदालानतकनहींपहुँचा
ख़्वाबतोबेशतरनज़रआए
कोईउनवानतकनहींपहुँचा
आजफिरमरगयाकिताबोंमें
फूलगुलदानतकनहींपहुँचा
मेरीख़्वाहिशथीक़ैदसेछूटूॅं
कोईज़िंदानतकनहींपहुँचा
किसतरहहमइसेदवाकहदें
दर्दइमकानतकनहींपहुँचा
हुस्नतेराबहुतहैख़ूबमगर
माह-ए-कन'आनतकनहींपहुँचा
  - Khalid Azad
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy