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Meem Alif Shaz
zindagi maahir hai is shatranj men
zindagi maahir hai is shatranj men | ज़िन्दगी माहिर है इस शतरंज में
- Meem Alif Shaz
ज़िन्दगी
माहिर
है
इस
शतरंज
में
इसलिए
तो
चालें
चलती
रहती
है
- Meem Alif Shaz
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यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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किराए
के
घर
में
गई
ज़िन्दगी
कहाँ
ज़िन्दगी
में
रही
ज़िन्दगी
Umesh Maurya
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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तंग
आ
चुके
हैं
कशमकश-ए-ज़िंदगी
से
हम
ठुकरा
न
दें
जहाँ
को
कहीं
बे-दिली
से
हम
Sahir Ludhianvi
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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जब
से
हुआ
है
कंधे
से
बस्ते
का
बोझ
कम
बढ़ते
ही
जा
रहे
हैं
मेरी
ज़िंदगी
में
ग़म
Ankit Maurya
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रात
दिन
इक
यही
तो
गिला
है
तुझे
ज़िन्दगी
में
बहुत
कम
मिला
है
तुझे
Meem Alif Shaz
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एक
दो
ऐब
तो
तेरे
अंदर
भी
हैं
दोस्ती
करनी
है
तो
ज़ुबाँ
बंद
रख
Meem Alif Shaz
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मेरे
बग़ीचे
में
मोहब्बत
का
शजर
कैसा
लगा
बेघर
परिंदों
के
लिए
फूलों
का
घर
कैसा
लगा
यह
मौत
तो
देती
नहीं
मौका
सँभलने
का
कभी
जो
डूबा
वो
कैसे
बताए
यह
भँवर
कैसा
लगा
हर
नज़्म
का
उनवान
तेरे
नाम
पर
ही
रख
दिया
तुम
को
हमारे
इश्क़
करने
का
हुनर
कैसा
लगा
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Meem Alif Shaz
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मेरी
तक़दीर
मेरे
हाथ
में
थी
मगर
मैं
चाल
चलने
में
लगा
था
Meem Alif Shaz
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रस्म
अदा
हो
जाएगी
जाने
की
इक
दिन
कुछ
लम्हों
का
तमाशा
होगा
फिर
वीरानी
Meem Alif Shaz
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