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Meem Alif Shaz
raat din ik yahii to gilaa hai tujhe
raat din ik yahii to gilaa hai tujhe | रात दिन इक यही तो गिला है तुझे
- Meem Alif Shaz
रात
दिन
इक
यही
तो
गिला
है
तुझे
ज़िन्दगी
में
बहुत
कम
मिला
है
तुझे
- Meem Alif Shaz
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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ज़िन्दगी
से
ऐसे
काटा
सीन
उसने
इश्क़
का
देखता
है
कोई
जैसे
फ़िल्म
गाने
काट
कर
Ankit Maurya
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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हम
हैं
ना!
ये
जो
मुझ
सेे
कहते
हैं
ख़ुद
किसी
और
के
भरोसे
हैं
ज़िंदगी
के
लिए
बताओ
कुछ
ख़ुद-कुशी
के
तो
सौ
तरीक़े
हैं
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Vikram Gaur Vairagi
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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क्या
ख़ुशी
में
ज़िंदगी
का
होश
कम
रह
जाएगा
ग़म
अगर
मिट
भी
गया
एहसास-ए-ग़म
रह
जाएगा
Shakeel Badayuni
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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कभी
भी
हिज्र
में
मातम
नहीं
करते
कि
हम
तस्वीर
अपने
साथ
रखते
हैं
Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी
को
हम
तमाशा
क्यूँ
बनाए
जीना
है
तो
फिर
फ़साना
क्यूँ
बनाए
रात
में
जब
जगमगाते
हैं
सितारे
होश
खोकर
हम
सितारा
क्यूँ
बनाए
हम
भी
हिस्सा
हैं
ज़माने
का
क़सम
से
तो
नया
सा
इक
ज़माना
क्यूँ
बनाए
जो
हमारी
ज़िन्दगी
बर्बाद
कर
दे
ऐसे
लोगों
को
सहारा
क्यूँ
बनाए
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Meem Alif Shaz
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जब
हम
ने
अपने
ग़म
को
भुलाया
उस
के
बाद
सब
ने
बातों
का
तीर
चलाया
उस
के
बाद
पहले
तो
ज़िद
की
थोड़ी
सी
रिश्वत
लेलो
जब
लेली
तो
लोगों
को
बताया
उस
के
बाद
हम
ग़ैरों
से
लाए
थे
कुछ
सच्चे
रिश्ते
अपनो
ने
तो
उन
को
भी
सताया
उस
के
बाद
हम
तो
बस
ख़ुशबू
देने
गए
थे
उन
के
घर
फिर
भी
हम
को
दुश्मन
ही
बताया
उस
के
बाद
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Meem Alif Shaz
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कुछ
मालूम
नहीं
दीवाने
पे
क्या
गुज़री
लाश
बहुत
मोटी
थी
उस
गहरे
पानी
में
Meem Alif Shaz
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ख़ुदा
सब
को
बुलाता
है
वहाँ
पर
सिकंदर
देखता
होगा
हक़ीक़त
Meem Alif Shaz
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