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Meem Alif Shaz
meri taqdeer mere haath men thii
meri taqdeer mere haath men thii | मेरी तक़दीर मेरे हाथ में थी
- Meem Alif Shaz
मेरी
तक़दीर
मेरे
हाथ
में
थी
मगर
मैं
चाल
चलने
में
लगा
था
- Meem Alif Shaz
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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मेरी
क़िस्मत
कि
ये
दुनिया
मुझे
पहचानती
है
लोग
मर
जाते
हैं
पहचान
बनाने
के
लिए
Nadeem Farrukh
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कहीं
गुलाल
के
हिस्से
में
कोई
गाल
नहीं
कहीं
पे
गाल
की
तक़दीर
में
गुलाल
नहीं
Harman Dinesh
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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घर
से
निकले
हुए
बेटों
का
मुक़द्दर
मालूम
माँ
के
क़दमों
में
भी
जन्नत
नहीं
मिलने
वाली
Iftikhar Arif
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मैं
उन्हीं
आबादियों
में
जी
रहा
होता
कहीं
तुम
अगर
हँसते
नहीं
उस
दिन
मेरी
तक़दीर
पर
Zia Mazkoor
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कभी
मैं
अपने
हाथों
की
लकीरों
से
नहीं
उलझा
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
का
लिक्खा
भी
बदलता
है
Bashir Badr
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कोई
भी
रोक
न
पाता,
गुज़र
गया
होता
मेरा
नसीब-ए-मोहब्बत
सँवर
गया
होता
न
आईं
होती
जो
बेग़म
मेरी
अयादत
को
मैं
अस्पताल
की
नर्सों
पर
मर
गया
होता
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Paplu Lucknawi
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मिलना
था
इत्तिफ़ाक़
बिछड़ना
नसीब
था
वो
उतनी
दूर
हो
गया
जितना
क़रीब
था
Anjum Rehbar
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उठाओ
पथ्थरों
को
दूर
फेंको
बहुत
आसान
है
ग़म
को
हराना
Meem Alif Shaz
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वो
खिड़की
पे
गुमसुम
सी
बैठी
है
मैं
भी
ऑफ़िस
में
गुमसुम
बैठा
हूँ
Meem Alif Shaz
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ज़रा
गिरने
दो
अपनी
ज़ुल्फ़
मेरी
जाँ
कि
हम
तो
मुन्तज़िर
हैं
इन
अदाओं
के
Meem Alif Shaz
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मेरी
मोहब्बत
में
कोई
शामिल
न
हो
ऐसा
न
हो
वो
भी
मिरे
क़ाबिल
न
हो
काग़ज़
की
कश्ती
में
अगर
बैठा
हूँ
मैं
तूफ़ाँ
उधर
हो
या
न
हो
साहिल
न
हो
वो
मेरी
क़िस्मत
में
अगर
लिक्खी
नहीं
दिल
मिरा
उसके
हुस्न
का
काइल
न
हो
आसानियोँ
से
मुझ
को
नफ़रत
है
बहुत
काँटे
सफ़र
में
गर
न
हो
मंज़िल
न
हो
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Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी
भी
आदमी
की
ही
तरह
करती
है
बातें
मन
जलाना,
सच
छुपाना,
दिल
दुखाना,
ग़म
बढ़ाना
Meem Alif Shaz
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