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Meem Alif Shaz
zimmedaari kitnii zaalim hai
zimmedaari kitnii zaalim hai | ज़िम्मेदारी कितनी ज़ालिम है
- Meem Alif Shaz
ज़िम्मेदारी
कितनी
ज़ालिम
है
हम
को
घर
से
बाहर
रखती
है
- Meem Alif Shaz
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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उसकी
तस्वीरें
हैं
दिलकश
तो
होंगी
जैसी
दीवारें
हैं
वैसा
साया
है
एक
मैं
हूँ
जो
तेरे
क़त्ल
की
कोशिश
में
था
एक
तू
है
जो
जेल
में
खाना
लाया
है
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Tehzeeb Hafi
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सरफ़रोशी
की
तमन्ना
अब
हमारे
दिल
में
है
देखना
है
ज़ोर
कितना
बाज़ू-ए-क़ातिल
में
है
Bismil Azimabadi
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दामन
पे
कोई
छींट
न
ख़ंजर
पे
कोई
दाग़
तुम
क़त्ल
करो
हो
कि
करामात
करो
हो
Kaleem Aajiz
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चुरायगा
उसी
से
आँख
क़ातिल
ज़रा
सी
जान
जिस
बिस्मिल
में
होगी
Dagh Dehlvi
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क़त्ल
से
पहले
वो
हर
शख़्स
के
दिल
की
हसरत
पूछ
लेता
था
मगर
पूरी
नहीं
करता
था
Vishnu virat
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ये
उसकी
मेहरबानी
है
वो
घर
में
ही
सँवरती
है
निकल
आए
जो
महफ़िल
में
तो
क़त्ल-ए-आम
हो
जाए
Ashraf Jahangeer
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वो
क़त्ल
कर
के
मुझे
हर
किसी
से
पूछते
हैं
ये
काम
किसने
किया
है,
ये
काम
किस
का
था?
Dagh Dehlvi
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तेग़-बाज़ी
का
शौक़
अपनी
जगह
आप
तो
क़त्ल-ए-आम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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लहजे
में
अपने
नर्मी
तू
भी
लाया
कर
मुझ
को
बुलाया
कर,
मिरे
घर
आया
कर
तन्हाई
की
इस
धूप
में
मैं
जल
गया
अपनी
मोहब्बत
का
इधर
भी
साया
कर
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Meem Alif Shaz
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तुम
को
इमकान
नहीं
था
उस
दिन
यह
ख़ुशी
हाथ
से
गिर
जाएगी
Meem Alif Shaz
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गाँव
भी
छोड़ा,
इश्क़
भी
छोड़ा,
माँ
भी
छोड़ी
इस
रोज़ी
की
ख़ातिर
हम
ने
क्या
क्या
छोड़ा
Meem Alif Shaz
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भरौसा
तो
नहीं
तोड़ा
कभी
भी
मगर
मुझ
को
उसी
ने
तोड़
ड़ाला
Meem Alif Shaz
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तुम
चलते
चलते
क्यूँ
रुक
जाते
हो
अपने
ग़म
को
बाहर
क्यूँ
लाते
हो
जब
उम्मीद
नहीं
उस
के
आने
की
हर
वादे
से
ठोकर
क्यूँ
खाते
हो
जब
दुनिया
सुनती
ही
नहीं
ख़ामोशी
तुम
इतनी
ख़ामोशी
क्यूँ
गाते
हो
शीशे
से
बातें
करते
हो
लेकिन
मेरे
लिए
पत्थर
क्यूँ
बन
जाते
हो
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Meem Alif Shaz
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