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Meem Alif Shaz
zamaane ki KHaraabi ham se mat poochho
zamaane ki KHaraabi ham se mat poochho | ज़माने की ख़राबी हम से मत पूछो
- Meem Alif Shaz
ज़माने
की
ख़राबी
हम
से
मत
पूछो
ज़माना
नोच
लेगा
चाँद
की
रौनक
- Meem Alif Shaz
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उस
चाँद
को
भी
रश्क
होता
था
उसी
को
देख
कर
मैं
भी
खुले
आकाश
में
तस्वीर
उसकी
चूमता
Ankit Yadav
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कि
जैसे
चाँद
निकलेगा
यहीं
से
मैं
ऐसे
एक
खिड़की
देखता
हूँ
Aks samastipuri
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तेरी
हर
बात
मोहब्बत
में
गवारा
कर
के
दिल
के
बाज़ार
में
बैठे
हैं
ख़सारा
कर
के
आसमानों
की
तरफ़
फेंक
दिया
है
मैं
ने
चंद
मिट्टी
के
चराग़ों
को
सितारा
कर
के
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Rahat Indori
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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कोई
चेहरा
किसी
को
उम्र
भर
अच्छा
नहीं
लगता
हसीं
है
चाँद
भी,
शब
भर
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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सूरज
सितारे
चाँद
मेरे
साथ
में
रहे
जब
तक
तुम्हारे
हाथ
मेरे
हाथ
में
रहे
Rahat Indori
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वो
अगर
हँस
दे
तो
मैं
लिख
दूँ
क़सीदे
चाँद
तक
इश्क़
करने
का
सलीक़ा
वो
सिखाती
है
बहुत
Amaan Pathan
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चंद
उम्मीदें
निचोड़ी
थीं
तो
आहें
टपकीं
दिल
को
पिघलाएँ
तो
हो
सकता
है
साँसें
निकलें
Gulzar
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ये
शफ़क़
चाँद
सितारे
नहीं
अच्छे
लगते
तुम
नहीं
हो
तो
नज़ारे
नहीं
अच्छे
लगते
Indira Varma
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उस
के
चेहरे
की
चमक
के
सामने
सादा
लगा
आसमाँ
पे
चाँद
पूरा
था
मगर
आधा
लगा
Iftikhar Naseem
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वो
खिड़की
पे
गुमसुम
सी
बैठी
है
मैं
भी
ऑफ़िस
में
गुमसुम
बैठा
हूँ
Meem Alif Shaz
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उस
के
घर
में
चाँद
सितारें
है
तो
होने
दो
मुझ
को
अपने
घर
की
चटाई
अच्छी
लगती
है
Meem Alif Shaz
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बारिश
आती
नहीं
दुकानों
से
हम
कैसे
आसमान
को
भूले
Meem Alif Shaz
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दिल
इश्क़
में
अब
मुब्तिला
सा
लगता
है
यह
जिस्म
भी
मुझ
को
नया
सा
लगता
है
क्या
ऐसा
भी
हो
सकता
है
इक
अजनबी
जो
आज
भी
क़िब्ला
नुमा
सा
लगता
है
तेरे
लिए
चल
पड़ता
हूँ
मैं
बस
उधर
उस
शहर
में
जो
रास्ता
सा
लगता
है
उस
को
अभी
जाना
था
लेकिन
रुक
गया
जिस
का
मुझे
रुकना
सज़ा
सा
लगता
है
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Meem Alif Shaz
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कारवाँ
हौसले
का
सफ़र
में
है
'शाज़'
टूटा
तो
लूट
लेगा
सितमगर
कोई
Meem Alif Shaz
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