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Meem Alif Shaz
vo aadmi achha nahin ho saktaa hai
vo aadmi achha nahin ho saktaa hai | वो आदमी अच्छा नहीं हो सकता है
- Meem Alif Shaz
वो
आदमी
अच्छा
नहीं
हो
सकता
है
जिस
से
मिरा
झगड़ा
नहीं
हो
सकता
है
तू
उस
से
मेरा
ज़िक्र
भी
कर
के
तो
देख
दुश्मन
सही
झूठा
नहीं
हो
सकता
है
- Meem Alif Shaz
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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ख़ास
तो
कुछ
भी
नहीं
बदला
तुम्हारे
बाद
में
पहले
गुम
रहता
था
तुम
में,
अब
तुम्हारी
याद
में
मोल
हासिल
हो
गया
है
मुझको
इक-इक
शे'र
का
सब
दिलासे
दे
रहे
हैं
मुझको
"जस्सर"
दाद
में
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Avtar Singh Jasser
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इन
दिनों
दोस्त
मेरे
सारे
ही
रूठे
हुए
हैं
मेरे
दुश्मन
यही
मौक़ा
है
हरा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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इसलिए
लड़ता
है
मुझ
सेे
मेरा
दुश्मन
उसका
भी
मेरे
सिवा
कोई
नहीं
है
Aves Sayyad
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तुम्हारे
ख़त
में
नया
इक
सलाम
किसका
था
न
था
रक़ीब
तो
आख़िर
वो
नाम
किसका
था
Dagh Dehlvi
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लहजा
ही
थोड़ा
तल्ख़
है
दुनिया
के
सामने
वैसे
तो
ठीक
ठाक
हूँ
मैं
बोल-चाल
में
Ankit Maurya
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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दश्त
छोड़े
हुए
अब
तो
अर्सा
हुआ
मैं
हूँ
मजनूँ
मगर
नाम
बदला
हुआ
मुझको
औरत
के
दुख
भी
पता
हैं
कि
मैं
एक
लड़का
हूँ
बेवा
का
पाला
हुआ
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Rishabh Sharma
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ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
Kashif Sayyed
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ऐसे
तेवर
दुश्मन
ही
के
होते
हैं
पता
करो
ये
लड़की
किस
की
बेटी
है
Zia Mazkoor
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अपने
ग़म
के
मज़ार
पे
जाता
हूँ
मैं
फिर
ख़ुद
को
बेहद
तन्हा
पाता
हूँ
मैं
Meem Alif Shaz
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उस
ने
शराब
को
भी
गुलाब
माना
फिर
ख़ुद
ही
पीने
को
सवाब
माना
Meem Alif Shaz
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किताबों
में
नहीं
पढ़ा
ये
इश्क़
कैसा
है
मगर
तिरी
निगाहों
ने
सिखाया
ये
मुफ़ीद
है
बहुत
Meem Alif Shaz
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हर
तरफ़
बादल
थे
हम
ने
इसलिए
देखा
नहीं
चाँद
खिड़की
में
फिर
देख
कर
तुझ
को
मनाई
ईद
हम
ने
Meem Alif Shaz
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मुझ
पे
हँसता
है
वो
आते
जाते
हुए
दर्द
दे
जाता
है
मुस्कुराते
हुए
किस
क़दर
रौशनी
थी
मिरे
जिस्म
में
बुझ
गया
हूँ
तिरे
पास
आते
हुए
ज़िन्दगी
की
हक़ीक़त
पता
चल
गई
रोया
हूँ
ख़ाक
अपनी
उड़ाते
हुए
उस
ने
जब
हाल
पूछा
मिरा
यह
हुआ
गिर
पड़ा
अपना
क़िस्सा
सुनाते
हुए
सीखा
है
कामयाबी
मिले
किस
तरह
बारिशों
में
पतंगे
उड़ाते
हुए
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Meem Alif Shaz
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