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Meem Alif Shaz
vaise to logon se kaafi raunak hai
vaise to logon se kaafi raunak hai | वैसे तो लोगों से काफ़ी रौनक है
- Meem Alif Shaz
वैसे
तो
लोगों
से
काफ़ी
रौनक
है
तुम
आती
तो
महफ़िल
में
ख़ुशबू
होती
- Meem Alif Shaz
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मोहब्बत
करने
वाले
कम
न
होंगे
तिरी
महफ़िल
में
लेकिन
हम
न
होंगे
Hafeez Hoshiarpuri
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मुझे
अँधेरे
से
बात
करनी
है
सो
करा
दो,
दिया
बुझा
दो
कुछ
एक
लम्हों
को
रौशनी
का
गला
दबा
दो,
दिया
बुझा
दो
रिवाज़-ए-महफ़िल
निभा
रहा
हूँ
बता
रहा
हूँ
मैं
जा
रहा
हूँ
मुझे
विदा
दो,
जो
रोना
चाहे
उन्हें
बुला
दो,
दिया
बुझा
दो
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Vikram Gaur Vairagi
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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ये
उसकी
मेहरबानी
है
वो
घर
में
ही
सँवरती
है
निकल
आए
जो
महफ़िल
में
तो
क़त्ल-ए-आम
हो
जाए
Ashraf Jahangeer
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दर्द
की
बात
किसी
हँसती
हुई
महफ़िल
में
जैसे
कह
दे
किसी
तुर्बत
पे
लतीफ़ा
कोई
Ahmad Rahi
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समुंदर
में
भी
सहरा
देखना
है
मुझे
महफ़िल
में
तन्हा
देख
लेना
Aqib khan
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अदब
वाले
अदब
की
महफ़िलें
पहचान
लेते
हैं
उन्हें
तुम
प्यार
से
कुछ
भी
कहो
वो
मान
लेते
हैं
जहाँ
तक
देख
सकते
हैं
वहाँ
तक
सुन
नहीं
सकते
मगर
जब
इश्क़
हो
जाए
तो
धड़कन
जान
लेते
हैं
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Hameed Sarwar Bahraichi
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पहले-पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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महीनों
तक
रहा
करते
थे
सब
मेहमान
आँखों
में,
मगर
अब
ख़्वाब
भी
आते
नहीं
वीरान
आँखों
में
ज़मान
ए
हिज्र
कहने
को
रिवाज़
ए
इश्क़
ही
तो
है,
मगर
क्या
क्या
नहीं
होता
है
इस
दौरान
आँखों
में
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Darpan
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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कितने
ज़ालिम
हैं
जो
करते
हैं
शिकायत
पत्थरों
से
भूल
जाते
हैं
कि
ठोकर
के
बिना
मंज़िल
नहीं
है
Meem Alif Shaz
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क़ातिल
को
ढूंढोगे
तो
तुम
खो
जाओगे
चुप
रहना
ही
यहाँ
ख़ुद
को
ज़िंदा
रखना
है
Meem Alif Shaz
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क़लम
भी
ज़ंग
आलूदा
है
अब
तो
क़लम
से
ज़ुल्म
को
कैसे
मिटाए
Meem Alif Shaz
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मिरा
दिल
तो
मुसाफ़िर
हो
गया
यारों
मुसलसल
एक
ही
घर
में
नहीं
रहता
Meem Alif Shaz
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मेरे
बग़ीचे
में
मोहब्बत
का
शजर
कैसा
लगा
बेघर
परिंदों
के
लिए
फूलों
का
घर
कैसा
लगा
यह
मौत
तो
देती
नहीं
मौका
सँभलने
का
कभी
जो
डूबा
वो
कैसे
बताए
यह
भँवर
कैसा
लगा
हर
नज़्म
का
उनवान
तेरे
नाम
पर
ही
रख
दिया
तुम
को
हमारे
इश्क़
करने
का
हुनर
कैसा
लगा
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Meem Alif Shaz
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