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Meem Alif Shaz
unke saath rahe ham phir bhi mil na sake
unke saath rahe ham phir bhi mil na sake | उनके साथ रहे हम फिर भी मिल न सके
- Meem Alif Shaz
उनके
साथ
रहे
हम
फिर
भी
मिल
न
सके
वो
मसरूफ़
बहुत
थे
अपने
ख़्यालों
में
- Meem Alif Shaz
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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अभी
तो
जाग
रहे
हैं
चराग़
राहों
के
अभी
है
दूर
सहर
थोड़ी
दूर
साथ
चलो
Ahmad Faraz
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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मोहब्बत
में
भी
सियासत
हो
जाए
अगर
इस
में
भी
रियासत
हो
जाए
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Meem Alif Shaz
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सुनता
हूँ
तेरी
यादों
की
झंकार
मैं
ख़्वाबों
में
छूता
हूँ
तिरे
रुख़सार
मैं
तेरे
लबों
पे
बैठे
कोई
तितली
भी
बर्दाश्त
कर
सकता
नहीं
यह
हार
मैं
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Meem Alif Shaz
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भुला
देंगे
तुझे
गर
बे-वफ़ा
निकली
हमारे
चाहने
वाले
हज़ारों
हैं
Meem Alif Shaz
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अकेले
भी
गुज़ारा
कर
के
देखा
अँधेरे
को
सहारा
कर
के
देखा
न
आई
जब
मदद
कोई
किसी
की
परिंदों
को
इशारा
कर
के
देखा
सुना
था
बे-वफ़ा
हो
सकती
है
वो
तभी
तो
इस्तिख़ारा
कर
के
देखा
मिरे
दिल
में
धुआँ
होने
लगा
था
ख़ुदा
का
ज़िक्र
सारा
कर
के
देखा
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Meem Alif Shaz
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रौशनी
को
अब
फैलाया
जाएगा
लोगों
को
फिर
से
संभाला
जाएगा
Meem Alif Shaz
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