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Meem Alif Shaz
tiri daulat tujhi ko ab mubarak ho
tiri daulat tujhi ko ab mubarak ho | तिरी दौलत तुझी को अब मुबारक हो
- Meem Alif Shaz
तिरी
दौलत
तुझी
को
अब
मुबारक
हो
हमें
सच
बेचना
बिल्कुल
नहीं
आता
- Meem Alif Shaz
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गाहे
गाहे
की
मुलाक़ात
ही
अच्छी
है
'अमीर'
क़द्र
खो
देता
है
हर
रोज़
का
आना
जाना
Ameer Minai
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आज
फिर
दिल
में
तिरे
दीद
की
हसरत
जागी
काश
फिर
काम
कोई
तुझ
से
ज़रूरी
निकले
Nilofar Noor
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ज़िन्दगी
छीन
ले
बख़्शी
हुई
दौलत
अपनी
तूने
ख़्वाबों
के
सिवा
मुझ
को
दिया
भी
क्या
है
Akhtar Saeed Khan
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ये
उसकी
मोहब्बत
है
कि
रुकता
है
तेरे
पास
वरना
तेरी
दौलत
के
सिवा
क्या
है
तेरे
पास
Zia Mazkoor
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बढ़
के
इम्कान
से
नुक़्सान
उठाए
हुए
हैं
हम
मुहब्बत
में
बहुत
नाम
कमाए
हुए
हैं
मेरे
मौला
मुझे
ता'बीर
की
दौलत
दे
दे
मैंने
इक
शख़्स
को
कुछ
ख़्वाब
दिखाए
हुए
हैं
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Ejaz Tawakkal Khan
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'हसरत'
की
भी
क़ुबूल
हो
मथुरा
में
हाज़िरी
सुनते
हैं
आशिक़ों
पे
तुम्हारा
करम
है
आज
Hasrat Mohani
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नहीं
हर
चंद
किसी
गुम-शुदा
जन्नत
की
तलाश
इक
न
इक
ख़ुल्द-ए-तरब-नाक
का
अरमाँ
है
ज़रूर
बज़्म-ए-दोशंबा
की
हसरत
तो
नहीं
है
मुझ
को
मेरी
नज़रों
में
कोई
और
शबिस्ताँ
है
ज़रूर
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Asrar Ul Haq Majaz
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कभी
तो
मुझे
छोड़
जाओगे
तुम
भी
कहोगे
मुझे
अब
कि
फुर्सत
नहीं
है
भला
इस
तरह
क्यूँ
सताने
लगे
हो
कहीं
छोड़
जाने
की
हसरत
नहीं
है
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Tiwari Jitendra
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जगह
की
क़ैद
नहीं
थी
कोई
कहीं
बैठे
जहाँ
मक़ाम
हमारा
था
हम
वहीं
बैठे
अमीर-ए-शहर
के
आने
पे
उठना
पड़ता
है
लिहाज़ा
अगली
सफ़ों
में
कभी
नहीं
बैठे
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Mehshar Afridi
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उस
हुस्न
के
सच्चे
मोती
को
हम
देख
सकें
पर
छू
न
सकें
जिसे
देख
सकें
पर
छू
न
सकें
वो
दौलत
क्या
वो
ख़ज़ाना
क्या
Ibn E Insha
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ख़बर
है
मुझ
को
इक
फ़नकार
मुझ
में
है
मगर
हालात
की
बौछार
मुझ
में
है
बुराई
मुझ
को
भी
बेज़ार
कर
देती
मगर
ईमान
की
तलवार
मुझ
में
है
दु'आ
से
बारिशें
तो
हो
नहीं
सकती
गुनाहों
का
भी
जब
भंडार
मुझ
में
है
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Meem Alif Shaz
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किसी
के
ख़ौफ़
से
रस्ता
नहीं
बदला
अमीरी
आई
तो
लहजा
नहीं
बदला
सभी
के
सामने
हँसते
रहे
लेकिन
ज़माने
के
लिए
चेहरा
नहीं
बदला
ख़बर
थी
दरिया
में
तूफ़ान
है
आया
महज़
इस
के
लिए
दरिया
नहीं
बदला
पढ़ाई
इश्क़
की
मुश्किल
बहुत
थी
शाज़
किताबों
का
मगर
बस्ता
नहीं
बदला
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Meem Alif Shaz
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इतना
ग़ुस्सा
पी
लेते
हो
कमाल
करते
हो
फिर
भी
सब
से
उलटे
सीधे
सवाल
करते
हो
Meem Alif Shaz
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अगर
मैं
ढूंँढ़ने
निकलूँ
किसी
दिन
शाज़
बहुत
बिखरा
हुआ
पाऊँगा
तुझ
को
मैं
Meem Alif Shaz
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सादगी
ने
तेरी
हम
को
भी
तो
धोके
में
रखा
धुंद
को
हम
चाँदनी
का
अक्स
ही
कहते
रहे
Meem Alif Shaz
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