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Meem Alif Shaz
tere jaate hi ghar men yuñ phaili tanhaaii
tere jaate hi ghar men yuñ phaili tanhaaii | तेरे जाते ही घर में यूँँ फैली तन्हाई
- Meem Alif Shaz
तेरे
जाते
ही
घर
में
यूँँ
फैली
तन्हाई
जैसे
आँगन
के
इक
चूल्हे
से
निकला
हो
धुआँ
- Meem Alif Shaz
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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हसीन
यादों
के
चाँद
को
अलविदा'अ
कह
कर
मैं
अपने
घर
के
अँधेरे
कमरों
में
लौट
आया
Hasan Abbasi
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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अभी
ज़िंदा
है
माँ
मेरी
मुझे
कुछ
भी
नहीं
होगा
मैं
घर
से
जब
निकलता
हूँ
दु'आ
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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घर
की
इस
बार
मुकम्मल
मैं
तलाशी
लूँगा
ग़म
छुपा
कर
मिरे
माँ
बाप
कहाँ
रखते
थे
Unknown
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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कहाँ
रोते
उसे
शादी
के
घर
में
सो
इक
सूनी
सड़क
पर
आ
गए
हम
Shariq Kaifi
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उस
के
लम्बे
होटों
को
सीना
ज़रूरी
है
बहुत
बोलना
क्या
आ
गया
वो
बोलता
ही
रहता
है
Meem Alif Shaz
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कामयाबी
देख
कर
मेरी
वो
जलता
रह
गया
इसलिए
उस
की
ख़ुशी
का
दरिया
सूखा
रह
गया
Meem Alif Shaz
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मैख़ाने
से
उठ
के
जब
घर
ही
जाना
है
फिर
पेमानों
से
दिल
को
क्यूँ
बहलाना
है
Meem Alif Shaz
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मुझे
तुम
भी
मोहब्बत
से
बुलाओ
तो
अना
का
यह
जो
पत्थर
है
हटाओ
तो
तुम्हारी
अहलिया
मैं
भी
हो
सकती
हूँ
मिरा
दिल
तुम
नज़ाकत
से
चुराओ
तो
सितारों
की
तरह
जब
जगमगाना
है
चराग़ों
की
तरह
ख़ुद
को
जलाओ
तो
ज़माना
पूछता
है
झूठ
वालों
को
ज़माने
को
ज़रा
सच
भी
सिखाओ
तो
हमेशा
ख़ूब
खाते
हो
अकेले
ही
गरीबों
को
भी
कुछ
दिल
से
खिलाओ
तो
ख़बर
जो
भी
छपेगी
झूठ
ही
होगी
हक़ीक़त
के
लिए
ख़ुद
को
चलाओ
तो
अँधेरा
भी
हमेशा
हार
जाएगा
कभी
दिल
का
दिया
तुम
भी
जलाओ
तो
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Meem Alif Shaz
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इस
जिस्म
के
लिए
भी
सच्ची
दु'आ
करो
जी
यह
उम्र
इस
को
खा
जाएगी
दवा
करो
जी
हर
रात
घूमता
है
चुप
चाप
आसमाँ
में
यह
चाँद
भी
अकेला
है
क्या
पता
करो
जी
काफ़ी
दिनों
से
कोई
झगड़ा
नहीं
हुआ
है
मुझ
से
मिरी
मोहब्बत
को
भी
ख़फ़ा
करो
जी
यह
हुस्न
कब
क़यामत
कर
दे
पता
नहीं
है
इस
हुस्न
में
छुपा
है
क्या
यह
पता
करो
जी
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Meem Alif Shaz
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