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Meem Alif Shaz
tamasha hone vaala hai ruko kuchh pal
tamasha hone vaala hai ruko kuchh pal | तमाशा होने वाला है रुको कुछ पल
- Meem Alif Shaz
तमाशा
होने
वाला
है
रुको
कुछ
पल
किसी
के
चोट
लगनी
है
अचानक
से
- Meem Alif Shaz
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गीत
लिक्खे
भी
तो
ऐसे
के
सुनाएँ
न
गए
ज़ख़्म
यूँँ
लफ़्ज़ों
में
उतरे
के
दिखाएँ
न
गए
आज
तक
रक्खे
हैं
पछतावे
की
अलमारी
में
एक
दो
वादे
जो
दोनों
से
निभाएँ
न
गए
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Farhat Abbas Shah
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सारी
दुनिया
के
ग़म
हमारे
हैं
और
सितम
ये
कि
हम
तुम्हारे
हैं
Jaun Elia
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हर
एक
सितम
पे
दाद
दी
हर
ज़ख़्म
पे
दु'आ
हमने
भी
दुश्मनों
को
सताया
बहुत
दिनों
Nawaz Deobandi
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एक
नज़र
देखते
तो
जाओ
मुझे
कब
कहा
है
गले
लगाओ
मुझे
तुमको
नुस्खा
भी
लिख
के
दे
दूँगा
ज़ख़्म
तो
ठीक
से
दिखाओ
मुझे
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Zia Mazkoor
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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जो
सारे
ज़ख़्म
मेरे
भर
दिया
करता
उसी
के
नाम
का
ख़ंजर
बनाया
है
Parul Singh "Noor"
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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चोट
खाई
थी
एक
बार
मगर
उम्र
भर
को
बिखर
गए
हैं
हम
Munazzah Noor
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जब
भी
उस
कूचे
में
जाना
पड़ता
है
ज़ख़्मों
पर
तेज़ाब
लगाना
पड़ता
है
उसके
घर
से
दूर
नहीं
है
मेरा
घर
रस्ते
में
पर
एक
ज़माना
पड़ता
है
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Subhan Asad
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सितम
भी
मुझ
पे
वो
करता
रहा
करम
की
तरह
वो
मेहरबाँ
तो
न
था
मेहरबान
जैसा
था
Anwar Taban
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कल
भूखे
हम
सोए
थे
या
फिर
कोई
और
कल
क्या
हुआ
था
सोच
कर
डर
लगता
है
Meem Alif Shaz
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देखो
हज़ारों
घर
यहाँ
फिर
बह
गए
तूफ़ान
के
ताज़ा
निशाँ
फिर
रह
गए
पानी
ही
पानी
घूमता
है
अब
इधर
टूटे
हुए
ख़्वाबों
के
चहरे
रह
गए
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Meem Alif Shaz
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उस
के
लफ़्ज़ों
में
नाख़ून
छुपे
थे
ज़ख़्म
तभी
तो
इतना
गहरा
हुआ
है
Meem Alif Shaz
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जो
कभी
महफ़िलों
में
नहीं
बैठते
उन
सेे
मत
पूछिए
बोलने
की
सज़ा
Meem Alif Shaz
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सुब्ह
से
शाम
तक
है
बेक़रारी
सी
तिरी
यादें
नहीं
देती
ख़ुशी
के
पल
Meem Alif Shaz
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