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Meem Alif Shaz
saraapa noor un ka jaan hi lega
saraapa noor un ka jaan hi lega | सरापा नूर उन का जान ही लेगा
- Meem Alif Shaz
सरापा
नूर
उन
का
जान
ही
लेगा
अभी
तो
बैठे
हैं
वो
एक
चिलमन
में
- Meem Alif Shaz
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हुस्न
कुछ
और
नहीं
छत
की
हरी
काई
है
वक़्त-बे-वक़्त
जहाँ
पाँव
फिसल
जाता
है
Ashu Mishra
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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हुस्न
ऐसा
है
कि
देखो
तो
लगे
ताज-महल
इस
पे
वो
शख़्स
सँवरता
भी
ग़ज़ल
जैसा
है
Manazir Ashiq Harganvi
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शाम
भी
थी
धुआँ
धुआँ
हुस्न
भी
था
उदास
उदास
दिल
को
कई
कहानियाँ
याद
सी
आ
के
रह
गईं
Firaq Gorakhpuri
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उम्र
भर
मिलने
नहीं
देती
हैं
अब
तो
रंजिशें
वक़्त
हम
से
रूठ
जाने
की
अदा
तक
ले
गया
Fasih Akmal
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तुझे
कौन
जानता
था
मेरी
दोस्ती
से
पहले
तेरा
हुस्न
कुछ
नहीं
था
मेरी
शा'इरी
से
पहले
Kaif Bhopali
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इश्क़
को
जब
हुस्न
से
नज़रें
मिलाना
आ
गया
ख़ुद-ब-ख़ुद
घबरा
के
क़दमों
में
ज़माना
आ
गया
Asad Bhopali
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ख़ुदा
जाने
किस
किस
की
ये
जान
लेगी
वो
क़ातिल
अदा
वो
क़ज़ा
महकी
महकी
Hasrat Jaipuri
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लुटाते
हैं
वो
दौलत
हुस्न
की
बावर
नहीं
आता
हमें
तो
एक
बोसा
भी
बड़ी
मुश्किल
से
मिलता
है
Jaleel Manikpuri
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ये
लाल
शा
में
ये
लाल
अंबर
ये
लाल
सूरज
चमक
रहा
है
मुझे
बता
दो
कहाँ
है
खोई
तिरे
लबों
की
ये
सुर्ख़
लाली
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Anmol Mishra
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छुपाओगे
ये
आँसू
तो
यही
होगा
अधूरी
बात
निकलेगी
ज़ुबाँ
से
Meem Alif Shaz
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ज़माने
को
ज़रूरत
थी
हमारी
सो
उस
ने
ख़ूब
काँटे
ही
चुभाए
Meem Alif Shaz
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बात
फिर
बात
तो
रह
नहीं
सकती
शाज़
मुँह
से
निकले
तो
फिर
वो
बदल
जाती
है
Meem Alif Shaz
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कुछ
बोलिए,
कुछ
बोलिए,
कुछ
बोलिए
अब
हम
ने
अपने
दाग़
ख़ुद
ही
धोलिए
गर्मी
बहुत
है
और
बादल
भी
नहीं
अब
आप
ही
अपनी
ये
ज़ुल्फ़ें
खोलिए
यह
ज़ोम
हम
को
भी
फ़ना
कर
ही
न
दे
हम
इसलिए
ऊपर
से
नीचे
हो
लिए
कोई
न
कोई
तो
यहाँ
आए
कभी
हम
भी
हमेशा
बस
अकेले
रो
लिए
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Meem Alif Shaz
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ज़माना
ज़ुल्म
करता
है
ख़ुशी
से
कभी
तुझ
को
कभी
मुझ
को
सताए
Meem Alif Shaz
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