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Meem Alif Shaz
zamaane ko zaroorat thii hamaari
zamaane ko zaroorat thii hamaari | ज़माने को ज़रूरत थी हमारी
- Meem Alif Shaz
ज़माने
को
ज़रूरत
थी
हमारी
सो
उस
ने
ख़ूब
काँटे
ही
चुभाए
- Meem Alif Shaz
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काँटे
बनकर
वापस
क्यूँँ
आ
जाते
हैं?
हमने
तुमको
फूल
जो
भेजे
होते
हैं
Riyaz Tariq
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जता
दिया
कि
मोहब्बत
में
ग़म
भी
होते
हैं
दिया
गुलाब
तो
काँटे
भी
थे
गुलाब
के
साथ
Rehman Faris
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कोई
काँटा
कोई
पत्थर
नहीं
है
तो
फिर
तू
सीधे
रस्ते
पर
नहीं
है
मैं
इस
दुनिया
के
अंदर
रह
रहा
हूँ
मगर
दुनिया
मेरे
अंदर
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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काँटा
सा
जो
चुभा
था
वो
लौ
दे
गया
है
क्या
घुलता
हुआ
लहू
में
ये
ख़ुर्शीद
सा
है
क्या
Ada Jafarey
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एक
तितली
से
वा'दा
है
सो
गुलशन
में,
ग़लती
से
भी
ख़ार
नहीं
देखूँगा
मैं
(ख़ार-
काँटें
)
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Darpan
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गुलशन
से
कोई
फूल
मुयस्सर
न
जब
हुआ
तितली
ने
राखी
बाँध
दी
काँटे
की
नोक
पर
Unknown
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इक
ख़ार
क्या
चुभा
है
के
पगला
गए
जनाब
पौधा
गुलाब
का
था
वो
कहने
लगे
बबूल
Aqib khan
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तुम्हारे
दिल
की
चुभन
भी
ज़रूर
कम
होगी
किसी
के
पाँव
का
काँटा
निकाल
कर
देखो
Kunwar Bechain
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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कैसे
बताएँ
हाल
मुहब्बत
में
क्या
हुआ
उसको
मिले
गुलाब
तो
काँटे
मिले
मुझे
Aadi Ratnam
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हिज्र
के
पानी
में
खो
जाएगा
दिल
तो
इक
छोटा
सा
सफ़ीना
है
Meem Alif Shaz
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तुम
चाहो
तो
फिर
मिल
सकते
हो
मुझ
से
दिल
टूटा
है
लेकिन
मैं
वैसा
ही
हूँ
Meem Alif Shaz
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है
समझदार
तो
ये
इशारा
समझ
अपनी
शोहरत
को
तू
इक
नज़ारा
समझ
जो
हुआ
सो
हुआ
अब
भुला
दे
उसे
इस
मोहब्बत
को
मेरी
दुबारा
समझ
उस
की
बाहों
में
भी
तू
अगर
ख़ुश
नहीं
बेवफ़ाई
का
इस
को
इशारा
समझ
बात
गर
चाँद
से
हो
न
पाई
तिरी
इस
मुलाक़ात
को
इक
नज़ारा
समझ
इश्क़
के
बाद
भी
तू
अगर
है
उदास
इस
इनायत
को
अपना
ख़सारा
समझ
हम
बड़ों
की
दुआएँ
भी
ली
है
अगर
दरिया
के
हर
भँवर
को
किनारा
समझ
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Meem Alif Shaz
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दिल
की
नस
नस
जुड़ी
है
तिरे
नाम
से
कैसे
भूले
तुझे
एक
दो
जाम
से
मेरी
बीनाई
भी
कम
हुई
जाती
है
इतना
ढूँढा
तुझे
तेरे
पैग़ाम
से
तूने
मेंहदी
रचा
ली
है
हाथों
पे
क्या
दिल
बहुत
ग़म
ज़दा
है
मिरा
शाम
से
अब
पशेमानी
कोई
न
होगी
मुझे
मैं
परेशाँ
था
उल्फ़त
के
ही
काम
से
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Meem Alif Shaz
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दरख़्तों
से
न
तोड़ो
फूल
कोई
तुम
जुदाई
की
हक़ीक़त
पूछो
इक
माँ
से
Meem Alif Shaz
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