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Meem Alif Shaz
sadaqat se likhte hain apni kahaanii
sadaqat se likhte hain apni kahaanii | सदाक़त से लिखते हैं अपनी कहानी
- Meem Alif Shaz
सदाक़त
से
लिखते
हैं
अपनी
कहानी
मोहब्बत
मिली
है
हमें
आसमानी
अगर
हम
से
पूछो
तो
तुम
को
बताएँ
जवानी
मोहब्बत
मोहब्बत
जवानी
- Meem Alif Shaz
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लुटा
दी
है
जवानी
जिसने
अपना
घर
बनाने
में
वही
बूढ़ा
हुआ
तो
घर
से
बेघर
हो
गया
है
अब
Nirbhay Nishchhal
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गुदाज़-ए-इश्क़
नहीं
कम
जो
मैं
जवाँ
न
रहा
वही
है
आग
मगर
आग
में
धुआँ
न
रहा
Jigar Moradabadi
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सैर
कर
दुनिया
की
ग़ाफ़िल
ज़िंदगानी
फिर
कहाँ
ज़िंदगी
गर
कुछ
रही
तो
ये
जवानी
फिर
कहाँ
Khwaja Meer Dard
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अदब
ता'लीम
का
जौहर
है
ज़ेवर
है
जवानी
का
वही
शागिर्द
हैं
जो
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Chakbast Brij Narayan
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जवान
हो
गई
इक
नस्ल
सुनते
सुनते
ग़ज़ल
हम
और
हो
गए
बूढ़े
ग़ज़ल
सुनाते
हुए
Azhar Inayati
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जवाँ
होने
लगे
जब
वो
तो
हम
से
कर
लिया
पर्दा
हया
यक-लख़्त
आई
और
शबाब
आहिस्ता
आहिस्ता
Ameer Minai
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सफ़र
पीछे
की
जानिब
है
क़दम
आगे
है
मेरा
मैं
बूढ़ा
होता
जाता
हूँ
जवाँ
होने
की
ख़ातिर
Zafar Iqbal
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मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
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Paplu Lucknawi
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ये
जो
ढलती
हुई
जवानी
है
हर
नए
साल
की
कहानी
है
देख
आँखें
मेरी
बता
मुझको
इस
में
किस
नाम
की
निशानी
है
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Aman Mishra 'Anant'
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लोग
हर
मोड़
पे
रुक
रुक
के
सँभलते
क्यूँँ
हैं
इतना
डरते
हैं
तो
फिर
घर
से
निकलते
क्यूँँ
हैं
मोड़
होता
है
जवानी
का
सँभलने
के
लिए
और
सब
लोग
यहीं
आ
के
फिसलते
क्यूँँ
हैं
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Rahat Indori
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सितम
तो
देखिए
उनकी
अदाओं
का
कि
हम
नीचे
खड़े
रहते
हैं
खिड़की
के
Meem Alif Shaz
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आँखों
में
ग़ुस्सा,
होंठों
पे
चाहत
इस
को
कहते
है
थोड़ी
सी
हिम्मत
Meem Alif Shaz
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मेरे
दुश्मन
को
वफ़ादार
समझते
हैं
लोग
पर
मुझे
आज
भी
ग़द्दार
समझते
हैं
लोग
ग़मज़दा
होते
हुए
भी
मैं
तो
हँस
देता
हूँ
इसलिए
मुझ
को
अदाकार
समझते
हैं
लोग
इक
परिंदे
को
रिहा
ही
तो
किया
था
मैंने
आज
तक
मुझ
को
गुनहगार
समझते
हैं
लोग
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Meem Alif Shaz
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घर
में
काफ़ी
घुटन
है
किधर
जाएँ
हम
बस
यही
चाहते
हैं
बिखर
जाएँ
हम
Meem Alif Shaz
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अपनी
आँखों
से
किसी
दिन
यह
तमाशा
देखना
दर्द
में
रोते
हुए
ख़ुद
को
ही
तन्हा
देखना
पहले
तुम
सीखो
ज़रा
तैराकी
का
हर
इक
हुनर
साथ
चलते
चलते
फिर
हर
एक
दरिया
देखना
"शाज़"
घर
से
दूर
तो
बस
अजनबी
ही
मिलते
हैं
जब
कभी
घर
जाओ
तो
कोई
शनासा
देखना
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Meem Alif Shaz
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