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Meem Alif Shaz
sab ke sab shaamil the mirii taraqqi men
sab ke sab shaamil the mirii taraqqi men | सब के सब शामिल थे मेरी तरक़्क़ी में
- Meem Alif Shaz
सब
के
सब
शामिल
थे
मेरी
तरक़्क़ी
में
सब
ने
ही
की
थी
बेहद
तनक़ीद
मिरी
- Meem Alif Shaz
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वो
जो
इक
शख़्स
मुझे
ताना-ए-जाँ
देता
है
मरने
लगता
हूँ
तो
मरने
भी
कहाँ
देता
है
तेरी
शर्तों
पे
ही
करना
है
अगर
तुझको
क़ुबूल
ये
सहूलत
तो
मुझे
सारा
जहाँ
देता
है
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Azhar Faragh
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अलग
अंदाज़
हैं
दोनों
के
अपनी
बात
कहने
के
मैं
उसपे
शे'र
कहता
हूँ,
वो
ताना
मार
देती
है
Ankit Maurya
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तन्हाई
ये
तंज
करे
है
तन्हा
क्यूँ
है
यार
कहाँ
है
आगे
पीछे
चलने
वाले
Vishal Singh Tabish
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मैं
पहले
हारी
थी
इस
बार
हारने
की
नहीं
तू
जा
रहा
है
तो
जा
मैं
पुकारने
की
नहीं
मुझे
पहाड़ों
पे
मौसम
का
लुत्फ़
लेना
है
मैं
तेरे
कमरे
में
सर्दी
गुज़ारने
की
नहीं
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Mumtaz Naseem
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ग़ुरूर-ए-लुत्फ़-ए-साक़ी
नश्शा-ए-बे-बाकी-ए-मस्ताँ
नम-ए-दामान-ए-इस्याँ
है
तरावत
मौज-ए-कौसर
की
Mirza Ghalib
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तुम
इस
ख़मोश
तबीअत
पे
तंज़
मत
करना
वो
सोचता
है
बहुत
और
बोलता
कम
है
Nawaz Deobandi
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ये
लुत्फ़
मुझ
पर
किसलिए
एहसान
का
क्या
फ़ाइदा
अब
वक़्त
सारा
कट
चुका,
अच्छा-बुरा,
थोड़ा-बहुत
Aziz Nabeel
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कहीं
वो
आ
के
मिटा
दें
न
इंतिज़ार
का
लुत्फ़
कहीं
क़ुबूल
न
हो
जाए
इल्तिजा
मेरी
Hasrat Jaipuri
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उस
की
ख़्वाहिश
पे
तुम
को
भरोसा
भी
है
उस
के
होने
न
होने
का
झगड़ा
भी
है
लुत्फ़
आया
तुम्हें
गुमरही
ने
कहा
गुमरही
के
लिए
एक
ताज़ा
ग़ज़ल
Irfan Sattar
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ज़िंदगी
पर
इस
से
बढ़
कर
तंज़
क्या
होगा
'फ़राज़'
उस
का
ये
कहना
कि
तू
शाएर
है
दीवाना
नहीं
Ahmad Faraz
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तेरे
इश्क़
ने
तो
ऐसे
घेरा
है
अब
मुझ
को
जैसे
कंगन
ने
तेरे
हाथों
को
घेरा
है
Meem Alif Shaz
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तेरी
ज़ुल्फ़ों
के
पेच-ओ-ख़म
में
उलझे
हैं
वरना
इक
दिन
हम
भी
फ़लक
पर
होते
बनके
कोई
सितारा
Meem Alif Shaz
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मेरे
घर
आते
ही
मेरे
बच्चे
दौड़
के
आते
हैं
लेकिन
मेरे
ख़ाली
हाथों
से
गुम
सुम
हो
जाते
हैं
Meem Alif Shaz
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मौत
से
राब्ता
ज़रूरी
है
हम
बुरे
को
बुरा
नहीं
कहते
Meem Alif Shaz
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हम
को
उम्र
से
ख़तरा
ही
ख़तरा
है
सिर
से
पैरों
तक
ज़ख़्मी
कर
देगी
Meem Alif Shaz
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