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Meem Alif Shaz
nange paanv chale to ham ne jaana
nange paanv chale to ham ne jaana | नंगे पाँव चले तो हम ने जाना
- Meem Alif Shaz
नंगे
पाँव
चले
तो
हम
ने
जाना
यह
दुनिया
आराम
की
गाह
नहीं
है
- Meem Alif Shaz
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एक
तख़्ती
अम्न
के
पैग़ाम
की
टांग
दीजे
ऊंचे
मीनारों
के
बीच
Aziz Nabeel
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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चैन
की
बाँसुरी
बजाइये
आप
शहर
जलता
है
और
गाइये
आप
हैं
तटस्थ
या
कि
आप
नीरो
हैं
असली
सूरत
ज़रा
दिखाइये
आप
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Gorakh Pandey
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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दिल्ली
से
हम
ही
बोला
करें
अम्न
की
बोली
यारो
तुम
भी
कभी
लाहौर
से
बोलो
Rahat Indori
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इसीलिए
मैं
बिछड़ने
पर
सोगवार
नहीं,
सुकून
पहली
ज़रूरत
है,
तेरा
प्यार
नहीं!
जवाब
ढ़ूंढ़ने
में
उम्र
मत
गँवा
देना,
सवाल
करती
है
दुनिया
पर
एतबार
नहीं
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Balmohan Pandey
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उसूली
तौर
पे
मर
जाना
चाहिए
था
मगर
मुझे
सुकून
मिला
है
तुझे
जुदा
कर
के
Ali Zaryoun
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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फूलों
की
सेज
पर
ज़रा
आराम
क्या
किया
उस
गुल-बदन
पे
नक़्श
उठ
आए
गुलाब
के
Adil Mansuri
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इतना
ग़ुस्सा
पी
लेते
हो
कमाल
करते
हो
फिर
भी
सब
से
उलटे
सीधे
सवाल
करते
हो
Meem Alif Shaz
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इस
मोहब्बत
ने
पागल
बना
रक्खा
है
आँखों
को
ख़्वाबों
में
ही
लगा
रक्खा
है
वो
अगर
साँवली
भी
है
तो
क्या
हुआ
हम
ने
लफ़्ज़ों
से
उस
को
सजा
रक्खा
है
ज़ुल्म
की
इंतिहा
कर
दी
उस
ने
मगर
कुछ
कमीनों
ने
सर
पर
उठा
रक्खा
है
हम
गरीबों
के
भी
एक
दो
ख़्वाब
हैं
अपने
ख़्वाबों
ने
हम
को
बचा
रक्खा
है
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Meem Alif Shaz
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मोहब्बत
में
भी
रंजिश
हो
रही
है
मिरी
आँखों
से
बारिश
हो
रही
है
बहुत
ही
बढ़
गए
हैं
जुर्म
सब
के
ज़मीनों
में
तो
जुम्बिश
हो
रही
है
बहारें
इतनी
दिलकश
हैं
कि
इस
बार
मुलाक़ातों
की
ख़्वाहिश
हो
रही
है
ज़रा
सा
पैसा
आते
ही
यहाँ
तो
तकब्बूर
की
नुमाइश
हो
रही
है
दुआएँ
रंग
लाती
ही
नहीं
अब
कहीं
तो
हम
से
लग़्ज़िश
हो
रही
है
हवाएँ
तो
अभी
तक
खिड़की
पे
थी
मगर
अब
घर
से
साज़िश
हो
रही
है
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Meem Alif Shaz
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हमारी
ज़ख़्मों
से
यारी
पुरानी
है
कि
जब
चाहें
चले
आते
हैं
वो
मिलने
Meem Alif Shaz
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सब
ने
यही
सोचा
की
वो
आवाज़
है
तूफ़ान
तो
ऐसे
नहीं
आता
कभी
Meem Alif Shaz
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