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Meem Alif Shaz
nahin bhoolo december ki navaazish ko
nahin bhoolo december ki navaazish ko | नहीं भूलो दिसंबर की नवाज़िश को
- Meem Alif Shaz
नहीं
भूलो
दिसंबर
की
नवाज़िश
को
कि
इस
ने
जनवरी
को
भी
बुलाया
है
- Meem Alif Shaz
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वो
ज़ालिम
मेरी
हर
ख़्वाहिश
ये
कह
कर
टाल
जाता
है
दिसंबर
जनवरी
में
कोई
नैनीताल
जाता
है?
Munawwar Rana
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हर
दिसम्बर
इसी
वहशत
में
गुज़ारा
कि
कहीं
फिर
से
आँखों
में
तिरे
ख़्वाब
न
आने
लग
जाएँ
Rehana Roohi
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हो
मुबारक
आपको
ख़ुश-फ़हमी
साल-ए-नौ
की
पर
हमको
गुज़रे
वक़्त
का
मातम
मनाने
दीजिए
Harsh saxena
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किसी
को
साल-ए-नौ
की
क्या
मुबारकबाद
दी
जाए
कैलन्डर
के
बदलने
से
मुक़द्दर
कब
बदलता
है
Aitbar Sajid
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न
कोई
रंज
का
लम्हा
किसी
के
पास
आए
ख़ुदा
करे
कि
नया
साल
सब
को
रास
आए
Faryad Aazar
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पिछ्ला
बरस
तो
ख़ून
रुला
कर
गुज़र
गया
क्या
गुल
खिलाएगा
ये
नया
साल
दोस्तो
Farooq Engineer
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सफ़र
में
आख़िरी
पत्थर
के
बाद
आएगा
मज़ा
तो
यार
दिसंबर
के
बाद
आएगा
Rahat Indori
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ज़मीन-ओ-आसमाँ
को
जगमगा
दो
रौशनी
से
दिसम्बर
आज
मिलने
जा
रहा
है
जनवरी
से
Bhaskar Shukla
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ये
किस
ने
फ़ोन
पे
दी
साल-ए-नौ
की
तहनियत
मुझ
को
तमन्ना
रक़्स
करती
है
तख़य्युल
गुनगुनाता
है
Ali Sardar Jafri
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यादों
की
शाल
ओढ़
के
आवारा-गर्दियाँ
काटी
हैं
हम
ने
यूँँ
भी
दिसम्बर
की
सर्दियाँ
Unknown
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रात
इतनी
तवील
कैसे
है
नींद
आती
नहीं
सुकून
नहीं
Meem Alif Shaz
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क्यूँ
चुप
है
तू
कोई
सवाल
तो
कर
मेरे
दिल
का
भी
कुछ
ख़याल
तो
कर
थोड़ा
ग़ुस्सा,
कोई
शिकवा,
या
फिर
यूँँ
ही
चुप
रहने
का
मलाल
तो
कर
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Meem Alif Shaz
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कभी
फूलों
से
भी
तो
दोस्ती
कर
बुराई
तो
बहुत
कर
ली
ज़ुबाँ
से
Meem Alif Shaz
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चराग़ों
की
हुकूमत
चल
रही
है
जिधर
देखो
रफ़ाक़त
चल
रही
है
हमारी
नस्लें
सब
आबाद
होंगी
मोहब्बत
ही
मोहब्बत
चल
रही
है
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Meem Alif Shaz
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हम
भी
इक
दिन
ख़ुशबू
महकाएँगे
अपने
लहजे
को
फूल
बनाएँगे
तेरी
मेरी
करने
वाले
ये
लोग
काँटों
का
इक
क़िस्सा
बन
जाएँगे
किस
किस
को
परखे
अपनी
बातों
से
ऐसे
तो
ख़ुद
ही
परखे
जाएँगे
जिस
को
भी
चाहो
पूरा
ही
चाहो
वरना
दिल
के
टुकड़े
हो
जाएँगे
रिश्ते
कब
मिलते
हैं
बाज़ारों
में
इक
भी
टूटा
तो
फिर
पछताएँगे
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Meem Alif Shaz
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