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Meem Alif Shaz
ham bhi ik din khushboo mehkaayenge
ham bhi ik din khushboo mehkaayenge | हम भी इक दिन ख़ुशबू महकाएँगे
- Meem Alif Shaz
हम
भी
इक
दिन
ख़ुशबू
महकाएँगे
अपने
लहजे
को
फूल
बनाएँगे
तेरी
मेरी
करने
वाले
ये
लोग
काँटों
का
इक
क़िस्सा
बन
जाएँगे
किस
किस
को
परखे
अपनी
बातों
से
ऐसे
तो
ख़ुद
ही
परखे
जाएँगे
जिस
को
भी
चाहो
पूरा
ही
चाहो
वरना
दिल
के
टुकड़े
हो
जाएँगे
रिश्ते
कब
मिलते
हैं
बाज़ारों
में
इक
भी
टूटा
तो
फिर
पछताएँगे
- Meem Alif Shaz
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उसकी
तरफ़
से
फूल
भी
आएँगे
एक
रोज़
पत्थर
उठा
के
चूम
ले
इसको
पहल
समझ
Munawwar Rana
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नाम
लिख
लिख
के
तिरा
फूल
बनाने
वाला
आज
फिर
शबनमीं
आँखों
से
वरक़
धोता
है
Ghulam Mohammad Qasir
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अरे
सय्याद
हमीं
गुल
हैं
हमीं
बुलबुल
हैं
तू
ने
कुछ
आह
सुना
भी
नहीं
देखा
भी
नहीं
Firaq Gorakhpuri
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गूँध
के
गोया
पत्ती
गुल
की
वो
तरकीब
बनाई
है
रंग
बदन
का
तब
देखो
जब
चोली
भीगे
पसीने
में
Meer Taqi Meer
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लब
हैं
जैसे
गुल
सुमबुल
रंग-ए-याक़ूती
ख़ुद
को
मैख़ाना
तितली
का
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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मदमस्त
महकते
फूलों
को
इन
कलियों
को
चूमा
जाए
इक
ख़्वाहिश
मेरी
यह
भी
है
तेरी
गलियों
में
घूमा
जाए
Akash Rajpoot
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किसी
कली
किसी
गुल
में
किसी
चमन
में
नहीं
वो
रंग
है
ही
नहीं
जो
तिरे
बदन
में
नहीं
Farhat Ehsaas
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आप
अपने
से
हम-सुख़न
रहना
हमनशीं
साँस
फूल
जाती
है
Jaun Elia
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निगाह-ए-शोख़
का
क़ैदी
नहीं
है
कौन
यहाँ
किसे
तमन्ना
नहीं
फूल
चूमने
को
मिले
Aks samastipuri
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इक
गुल
के
मुरझाने
पर
क्या
गुलशन
में
कोहराम
मचा
इक
चेहरा
कुम्हला
जाने
से
कितने
दिल
नाशाद
हुए
Faiz Ahmad Faiz
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अपनी
परवाज़
से
आसमाँ
में
है
तू
हाए
यह
किस
तरह
के
गुमाँ
में
है
तू
Meem Alif Shaz
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दग़ा
देने
में
तो
फ़नकार
हैं
कुछ
लोग
मगर
ये
शर्म
से
मर
जाते
हैं
अकसर
Meem Alif Shaz
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पहले
क्या
थे
और
अब
क्या
हो
गए
लोग
अपने
कर्मों
से
तमाशा
हो
गए
लोग
बंदगी
पहले
भी
तो
होती
थी
लेकिन
अब
दु'आओं
से
मसीहा
हो
गए
लोग
इश्क़
भी
करने
नहीं
देते
करे
क्या
तन्हा
रहते
रहते
सहरा
हो
गए
लोग
शाज़
तू
भी
उनके
जैसा
मत
हो
जाना
वो
जो
चिड़ने
से
धुआँ
सा
हो
गए
लोग
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Meem Alif Shaz
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उन
सेे
दिल
मिलता
नहीं
है
जो
हमारे
हैं
मगर
मिलना
पड़ता
है
त'अल्लुक़
को
निभाने
के
लिए
Meem Alif Shaz
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मेरे
अंदर
जो
इक
बूढ़ा
रहता
है
कहता
है
दुनिया
से
बचके
रहना
तुम
Meem Alif Shaz
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