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Meem Alif Shaz
raat itni taveel kaise hai
raat itni taveel kaise hai | रात इतनी तवील कैसे है
- Meem Alif Shaz
रात
इतनी
तवील
कैसे
है
नींद
आती
नहीं
सुकून
नहीं
- Meem Alif Shaz
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चराग़ों
को
आँखों
में
महफ़ूज़
रखना
बड़ी
दूर
तक
रात
ही
रात
होगी
Bashir Badr
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एक
ही
शख़्स
नहीं
होता
सदा
दिल
का
सुकूँ
एक
करवट
पे
कभी
नींद
नहीं
आ
सकती
Rehan Mirza
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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कहाँ
है
तू
कि
तिरे
इंतिज़ार
में
ऐ
दोस्त
तमाम
रात
सुलगते
हैं
दिल
के
वीराने
Nasir Kazmi
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किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
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उसे
यूँँ
चेहरा-चेहरा
ढूँढता
हूँ
वो
जैसे
रात-दिन
सड़कों
पे
होगा
Shariq Kaifi
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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ख़्वाबों
को
आँखों
से
मिन्हा
करती
है
नींद
हमेशा
मुझ
सेे
धोखा
करती
है
उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वग़ैरा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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कल
चौदहवीं
की
रात
थी
शब
भर
रहा
चर्चा
तिरा
कुछ
ने
कहा
ये
चाँद
है
कुछ
ने
कहा
चेहरा
तिरा
Ibn E Insha
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दोस्ती
में
सज़ा
की
तमन्ना
न
कर
मेरे
ज़ख़्मों
का
इतना
तमाशा
न
कर
मैं
अगर
गिर
गया
हूँ
बहुत
ज़ोर
से
तूने
मुझ
को
गिराया
है
दावा
न
कर
कल
मिले
थे
गले
भी
लगे
थे
सनम
सुब्ह
होते
ही
फिर
से
तक़ाज़ा
न
कर
आज
साया
है
कल
धूप
होगी
वहाँ
अपने
साए
का
ऐसा
तमाशा
न
कर
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Meem Alif Shaz
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सफ़र
में
कभी
ऐसे
मंज़र
भी
आए
कभी
फूल
आए
तो
पथ्थर
भी
आए
मुयस्सर
नहीं
होता
आसानी
से
रिज़्क़
कि
बीमारी
में
हम
तो
दफ़्तर
भी
आए
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Meem Alif Shaz
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क़लम
को
ही
बना
शमशीर
हिम्मत
कर
जो
तेरा
है
उसे
लेने
की
जुर्रत
कर
Meem Alif Shaz
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तू
चली
ही
गई
तो
ख़ुशी
है
हमें
ज़िन्दगी
यह
सुकूँ
से
बसर
होगी
अब
Meem Alif Shaz
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परिंदे
तो
कभी
लड़ते
नहीं
हैं
ज़मीनों
पे
अगर
रहते
तो
शायद
Meem Alif Shaz
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