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Meem Alif Shaz
kis tarah ka zameer hai teraa
kis tarah ka zameer hai teraa | किस तरह का ज़मीर है तेरा
- Meem Alif Shaz
किस
तरह
का
ज़मीर
है
तेरा
पेड़
कटते
हुए
न
रोया
तू
- Meem Alif Shaz
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वो
पेड़
जिस
की
छाँव
में
कटी
थी
उम्र
गाँव
में
मैं
चूम
चूम
थक
गया
मगर
ये
दिल
भरा
नहीं
Hammad Niyazi
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हम
लोग
चूंकि
दश्त
के
पाले
हुए
हैं
सो
ख़्वाबों
में
चाहे
झील
हों,
आँखों
में
पेड़
हैं
Siddharth Saaz
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है
दुख
तो
कह
दो
किसी
पेड़
से
परिंदे
से
अब
आदमी
का
भरोसा
नहीं
है
प्यारे
कोई
Madan Mohan Danish
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दरख़्त
काट
के
जब
थक
गया
लकड़हारा
तो
इक
दरख़्त
के
साए
में
जा
के
बैठ
गया
Zubair Ali Tabish
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साया
है
कम
खजूर
के
ऊँचे
दरख़्त
का
उम्मीद
बाँधिए
न
बड़े
आदमी
के
साथ
Kaif Bhopali
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सवालन
उसने
पूछा
था
शजर
मैं
कैसी
लगती
हूँ
जवाबन
मैंने
ये
बोला
अति
सुन्दर
अति
सुन्दर
Shajar Abbas
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एक
साया
है
घने
पेड़
का
मेरे
सर
पर
एक
आँचल
से
मुझे
ठंडी
हवा
आती
है
Binte Reshma
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वो
पास
क्या
ज़रा
सा
मुस्कुरा
के
बैठ
गया
मैं
इस
मज़ाक़
को
दिल
से
लगा
के
बैठ
गया
दरख़्त
काट
के
जब
थक
गया
लकड़हारा
तो
इक
दरख़्त
के
साए
में
जा
के
बैठ
गया
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Zubair Ali Tabish
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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दोस्त
अपना
हक़
अदा
करने
लगे
बेवफ़ाई
हमनवा
करने
लगे
मेरे
घर
से
एक
चिंगारी
उठी
पेड़
पत्ते
सब
हवा
करने
लगे
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Santosh S Singh
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मेरे
दुश्मन
को
वफ़ादार
समझते
हैं
लोग
पर
मुझे
आज
भी
ग़द्दार
समझते
हैं
लोग
ग़मज़दा
होते
हुए
भी
मैं
तो
हँस
देता
हूँ
इसलिए
मुझ
को
अदाकार
समझते
हैं
लोग
इक
परिंदे
को
रिहा
ही
तो
किया
था
मैंने
आज
तक
मुझ
को
गुनहगार
समझते
हैं
लोग
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Meem Alif Shaz
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बात
तो
कुछ
नहीं
है
लेकिन
तुम
कुछ
नहीं
को
बहुत
कुछ
कहते
हो
Meem Alif Shaz
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चराग़ों
की
हुकूमत
चल
रही
है
जिधर
देखो
रफ़ाक़त
चल
रही
है
हमारी
नस्लें
सब
आबाद
होंगी
मोहब्बत
ही
मोहब्बत
चल
रही
है
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Meem Alif Shaz
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मेरे
अंदर
से
निकालो
मुझ
को
वरना
टूट
जाऊँगा
बदन
के
बोझ
से
मैं
Meem Alif Shaz
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शहर
ख़ामोश
था,
सुन
रहा
था
हमें
एक
पत्थर
जो
आया
तमाशा
हुआ
Meem Alif Shaz
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