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Meem Alif Shaz
kaash tum ko bhi samajh aa.e mohabbat
kaash tum ko bhi samajh aa.e mohabbat | काश तुम को भी समझ आए मोहब्बत
- Meem Alif Shaz
काश
तुम
को
भी
समझ
आए
मोहब्बत
और
फिर
मुझ
से
ही
हो
जाए
मोहब्बत
- Meem Alif Shaz
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भुला
पाना
बहुत
मुश्किल
है
सब
कुछ
याद
रहता
है
मोहब्बत
करने
वाला
इस
लिए
बर्बाद
रहता
है
Munawwar Rana
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सँभलने
के
लिए
कर
ली
मुहब्बत
मगर
इस
में
फिसलना
चाहिए
था
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Divy Kamaldhwaj
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अदावत
मुहब्बत
रफ़ाक़त
नहीं
है
हमें
तुम
सेे
कोई
शिकायत
नहीं
है
दिलों
को
लगाने
लगे
हो
जहाँँ
तुम
वहाँ
तो
किसी
को
मुहब्बत
नहीं
है
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Tiwari Jitendra
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ये
इश्क़
भी
मुझे
लगता
है
बेटियों
की
तरह
जो
माँगता
है
अमूमन
उसे
नहीं
मिलता
Dipendra Singh 'Raaz'
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तुम्हीं
से
प्यार
मुझको
इसलिए
है
ज़माना
आज़मा
कर
आ
गया
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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अवल्ली
इश्क़
के
एहसास
भी
तारी
रक्खे
और
इस
बीच
नए
काम
भी
जारी
रक्खे
मैंने
दिल
रख
लिया
है
ये
भी
कोई
कम
तो
नहीं
दूसरा
ढूँढ़
लो
जो
बात
तुम्हारी
रक्खे
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Ashu Mishra
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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किसी
भी
शख़्स
के
झूठे
दिलासे
में
नहीं
आती
कहानी
हो
अगर
लंबी
तराशे
में
नहीं
आती
जहाँ
में
अब
कहाँ
कोई
जो
मजनूँ
की
तरह
चाहे
मोहब्बत
इसलिए
भी
अब
तमाशे
में
नहीं
आती
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Ansar Ethvi
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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इक
काग़ज़
की
कश्ती
हूँ
लेकिन
मैं
पानी
पे
चलती
हूँ,
हिम्मत
देखो
Meem Alif Shaz
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हमारा
दिल
कहीं
पर
रह
गया
है
हाँ
उस
ख़त
में
जिसे
वो
पढ़
नहीं
पाई
Meem Alif Shaz
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मैं
तिरी
तलाश
में
निकल
पड़ा
हूँ
अजनबी
ज़िन्दगी
की
शाम
अब
कहाँ
हो
कुछ
पता
नहीं
Meem Alif Shaz
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वो
आँखें
नीचे
कर
के
बैठे
हैं
मगर
क़यामत
सी
सब
पे
ढ़ाई
है
Meem Alif Shaz
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चाँद
तारे
फ़लक
पे
चमकने
लगे
यादों
के
चेहरे
फिर
से
झलकने
लगे
जब
तिरी
उँगलियों
ने
छुआ
जिस्म
को
मिट्टी
के
अंग
सारे
महकने
लगे
धूप
ने
इस
तरह
से
जलाया
बदन
सारे
मज़दूर
सर
को
पटकने
लगे
जब
बड़ों
की
न
मानी
कभी
कोई
बात
बच्चे
मंज़िल
से
अपनी
भटकने
लगे
जब
सड़क
पे
निकल
के
वो
आई
परी
बूढ़ों
के
दिल
भी
धक
धक
धड़कने
लगे
देख
कर
मलबे
के
नीचे
मासूमों
को
लोगों
के
आँसू
टप
टप
टपकने
लगे
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Meem Alif Shaz
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