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Meem Alif Shaz
jab poora din uljhan se ladne men lag jaata hai
jab poora din uljhan se ladne men lag jaata hai | जब पूरा दिन उलझन से लड़ने में लग जाता है
- Meem Alif Shaz
जब
पूरा
दिन
उलझन
से
लड़ने
में
लग
जाता
है
कोई
शाम
को
घर
जाकर
कैसे
कुछ
मीठा
बोले
- Meem Alif Shaz
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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घर
की
इस
बार
मुकम्मल
मैं
तलाशी
लूँगा
ग़म
छुपा
कर
मिरे
माँ
बाप
कहाँ
रखते
थे
Unknown
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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अभी
ज़िंदा
है
माँ
मेरी
मुझे
कुछ
भी
नहीं
होगा
मैं
घर
से
जब
निकलता
हूँ
दु'आ
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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इन
का
उठना
नहीं
है
हश्र
से
कम
घर
की
दीवार
बाप
का
साया
Unknown
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वो
मेरे
घर
नहीं
आता
मैं
उस
के
घर
नहीं
जाता
मगर
इन
एहतियातों
से
त'अल्लुक़
मर
नहीं
जाता
Waseem Barelvi
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गुमान
है
या
किसी
विश्वास
में
है
सभी
अच्छे
दिनों
की
आस
में
है
ये
कैसा
जश्न
है
घर
वापसी
का
अभी
तो
राम
ही
वनवास
में
है
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Azhar Iqbal
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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उस
को
रुख़्सत
तो
किया
था
मुझे
मालूम
न
था
सारा
घर
ले
गया
घर
छोड़
के
जाने
वाला
Nida Fazli
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ज़िंदा
हो
के
रहना
है
मुझ
को
हमेशा
तू
मिरे
दिल
मैं
हज़ारों
ज़ख़्म
देदे
Meem Alif Shaz
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परिंदों
की
तरह
ही
देखना
है
आसमाँ
मुझ
को
वहीं
से
देखना
है
सारा
का
सारा
जहाँ
मुझ
को
Meem Alif Shaz
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इतनी
जल्दी
अच्छा
मैं
कैसे
बनूँ
यह
मरहला
है
हर
किसी
का
हिस्सा
मैं
कैसे
बनूँ
यह
मरहला
है
सब
मुझे
मासूम
कहकर
लूटलें
हर
इक
तरह
से
इस
तरह
का
बच्चा
मैं
कैसे
बनूँ
यह
मरहला
है
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Meem Alif Shaz
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ज़माने
को
तमाशा
चाहिए
था
तभी
तो
इतना
खुल
के
रो
पड़े
हम
Meem Alif Shaz
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तुझे
भी
पास
आना
चाहिए
था
मुझे
भी
पास
जाना
चाहिए
था
हवा
का
काम
है
दीया
बुझाना
तुझे
उसको
बचाना
चाहिए
था
वफ़ा
इक
ख़ूब-सूरत
फूल
भी
है
तुझे
दिल
में
उगाना
चाहिए
था
अना
कोई
पसंद
करता
नहीं
है
तुझे
इस
को
जलाना
चाहिए
था
अगर
बेचैन
था
तेरा
पड़ोसी
तुझे
मरहम
लगाना
चाहिए
था
ज़रा
सी
बात
पे
नाराज़
था
वो
तुझे
रिश्ता
निभाना
चाहिए
था
बहुत
छोटा
मगर
दिक्क़त
बड़ी
थी
तुझे
पथ्थर
हटाना
चाहिए
था
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Meem Alif Shaz
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