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Meem Alif Shaz
ham nahin chahte the tu badnaam ho
ham nahin chahte the tu badnaam ho | हम नहीं चाहते थे तू बदनाम हो
- Meem Alif Shaz
हम
नहीं
चाहते
थे
तू
बदनाम
हो
इसलिए
अपने
ग़म
को
छुपा
के
रखा
- Meem Alif Shaz
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कभी
हँसता
हूँ
तो
आँखें
कभी
मैं
नम
भी
रखता
हूँ
हर
इक
मुस्कान
के
पीछे
हज़ारों
ग़म
भी
रखता
हूँ
शिफ़ा
भी
दे
नहीं
सकता
मुझे
कोई
मेरा
अपना
नतीजन
मैं
मिरे
ज़ख़्मों
का
ख़ुद
मरहम
भी
रखता
हूँ
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Shubham Dwivedi
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चारासाज़ो
मिरा
इलाज
करो
आज
कुछ
दर्द
में
कमी
सी
है
Azhar Nawaz
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ऐ
ग़म-ए-ज़िंदगी
न
हो
नाराज़
मुझ
को
आदत
है
मुस्कुराने
की
Abdul Hamid Adam
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कोई
अटका
हुआ
है
पल
शायद
वक़्त
में
पड़
गया
है
बल
शायद
दिल
अगर
है
तो
दर्द
भी
होगा
इस
का
कोई
नहीं
है
हल
शायद
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Gulzar
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हाए
उसके
हाथ
पीले
होने
का
ग़म
इतना
रोए
हैं
कि
आँखें
लाल
कर
ली
Harsh saxena
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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मशहूर
भी
हैं
बदनाम
भी
हैं
ख़ुशियों
के
नए
पैग़ाम
भी
हैं
कुछ
ग़म
के
बड़े
इनाम
भी
हैं
पढ़िए
तो
कहानी
काम
की
है
Anjum Barabankvi
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पुराने
घाव
पर
नाखून
उसका
लग
गया
वरना
गुज़र
कर
दर्द
ये
हद
से
दवा
होने
ही
वाला
था
Atul K Rai
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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कारवाँ
हौसले
का
सफ़र
में
है
'शाज़'
टूटा
तो
लूट
लेगा
सितमगर
कोई
Meem Alif Shaz
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परिंदे
देखते
हैं
मुझ
को
हैरत
से
पिलाता
हूँ
अगर
मैं
पानी
ख़िस्सत
से
अचानक
जिस
के
घर
से
लाशें
निकली
थी
परेशाँ
था
बहुत
वो
अपनी
ग़ुर्बत
से
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Meem Alif Shaz
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परिंदे
चाहते
हैं
ख़ूब
उड़ना
मगर
हम
तो
ग़ुलामी
चाहते
हैं
Meem Alif Shaz
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इश्क़
वाले
ख़ूब
पीते
हैं
ज़रूरी
तो
नहीं
ज़िन्दगी
को
ऐसे
जीते
हैं
ज़रूरी
तो
नहीं
हिज्र
तो
आता
ही
रहता
है
यूँँ
मौसम
की
तरह
हिज्र
में
फिर
और
पीते
हैं
ज़रूरी
तो
नहीं
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Meem Alif Shaz
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निगाहेँ
वो
ऐसे
झुकाए
हुए
हैं
क़यामत
मिरे
दिल
पे
ढाए
हुए
हैं
ख़फ़ा
जब
नहीं
है
तो
किस
बात
पे
वो
नज़र
अपनी
हम
से
चुराए
हुए
हैं
अगर
देख
ले
हम
को
यह
जान
जाए
कि
उम्मीद
हम
भी
लगाए
हुए
हैं
मुलाक़ात
कर
के
पता
यह
चला
है
लबों
पे
तबस्सुम
छुपाए
हुए
हैं
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Meem Alif Shaz
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