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Meem Alif Shaz
har ik phool paraaya ho jaayega
har ik phool paraaya ho jaayega | हर इक फूल पराया हो जाएगा
- Meem Alif Shaz
हर
इक
फूल
पराया
हो
जाएगा
तुम
खिलने
दो
इन
को
खुले
आँगन
में
- Meem Alif Shaz
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होली
है
या
फिर
फूलों
का
मौसम
है
सब
के
चेहरों
पे
रंग
है
ख़ुशबू
भी
है
Meem Alif Shaz
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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मदमस्त
महकते
फूलों
को
इन
कलियों
को
चूमा
जाए
इक
ख़्वाहिश
मेरी
यह
भी
है
तेरी
गलियों
में
घूमा
जाए
Akash Rajpoot
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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किसी
कली
किसी
गुल
में
किसी
चमन
में
नहीं
वो
रंग
है
ही
नहीं
जो
तिरे
बदन
में
नहीं
Farhat Ehsaas
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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है
समझना
आपको
तो
शे'र
से
इज़हार
समझें
बात
कहने
को
भला
हम
फूल
क्यूँ
तोड़ा
करेंगे
Ankit Maurya
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लब
हैं
जैसे
गुल
सुमबुल
रंग-ए-याक़ूती
ख़ुद
को
मैख़ाना
तितली
का
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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सुलग
रहे
थे
शजर
दिल
तमाम
भँवरों
के
दिल
अपना
वार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
बहुत
मलाल
हुआ
देखकर
गुलिस्ताँ
में
तमाचा
मार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
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Shajar Abbas
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तू
तो
अपनी
शातिर
आँखों
का
मुजरिम
है
प्यारे
फिर
बिन्त-ए-हव्वा
पर
क्यूँ
इल्ज़ाम
लगाया
जाए
Meem Alif Shaz
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हम
मोहब्बत
नहीं
करते
तो
बिखर
जाते
तुम
पास
अपने
नहीं
रखते
तो
किधर
जाते
तुम
Meem Alif Shaz
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इक
और
दिन
फिर
ढल
गया
है
दोस्तों
यह
ज़िन्दगी
धीरे
से
छोटी
हो
रही
है
Meem Alif Shaz
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बिखरे
हुए
घर
कब
सँवारे
जाएँगे
घर
वाले
कब
दिल
से
पुकारे
जाएँगे
हर
दिन
शिकायत
और
फिर
नाराज़गी
ऐसे
तो
सारे
रिश्ते
मारे
जाएँगे
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Meem Alif Shaz
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नंगे
पाँव
चले
तो
हम
ने
जाना
यह
दुनिया
आराम
की
गाह
नहीं
है
Meem Alif Shaz
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