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Meem Alif Shaz
ik boond laaya hooñ darakhton ke li.e
ik boond laaya hooñ darakhton ke li.e | इक बूँद लाया हूँ दरख़्तों के लिए
- Meem Alif Shaz
इक
बूँद
लाया
हूँ
दरख़्तों
के
लिए
मैं
इक
परिंदा
हूँ
यही
कर
सकता
हूँ
- Meem Alif Shaz
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दिल
से
जो
बात
निकलती
है
असर
रखती
है
पर
नहीं
ताक़त-ए-परवाज़
मगर
रखती
है
Allama Iqbal
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वो
क़ुर्बां
कर
चुके
थे
पंख
इक
दूजे
की
ख़ातिर
हवा
में
इसलिए
दोनों
बराबर
उड़
रहे
थे
Atul K Rai
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मुझे
मालूम
है
उस
का
ठिकाना
फिर
कहाँ
होगा
परिंदा
आसमाँ
छूने
में
जब
नाकाम
हो
जाए
Bashir Badr
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
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शिकारी
चीज़
क्या
है
जान
लेना
चाहिए
था
तड़पता
इक
परिंदा
जाल
में
छोड़ा
गया
था
Atul K Rai
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टहनी
पे
ख़मोश
इक
परिंदा
माज़ी
के
उलट
रहा
है
दफ़्तर
Rais Amrohvi
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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परों
को
खोल
ज़माना
उड़ान
देखता
है
ज़मीं
पे
बैठ
के
क्या
आसमान
देखता
है
Shakeel Azmi
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निकाल
लाया
हूँ
एक
पिंजरे
से
इक
परिंदा
अब
इस
परिंदे
के
दिल
से
पिंजरा
निकालना
है
Umair Najmi
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चाँद
गौहर
गुलाब
मुश्क
ग़ज़ल
इन
से
अच्छा
तुम्हारा
नाम
नहीं
Meem Alif Shaz
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मुकम्मल
कीजिए
अपनी
मोहब्बत
को
अधूरे
ख़्वाब
बेहद
दर्द
देते
हैं
Meem Alif Shaz
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ये
बहारें,
ये
सितारे,
ये
नज़ारे
सब
हँसी
हैं
गर
तू
मेरे
साथ
में
है
Meem Alif Shaz
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जब
आए
हो
तो
दो
बातें
मीठी
हो
जाए
तुम
पीछे
तो
बुराई
अकसर
करते
रहते
हो
Meem Alif Shaz
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तुम्हारे
लफ़्ज़ों
में
इतनी
थकन
क्यूँ
है
ग़ज़ल
ज़िंदा
है
तो
उस
पे
कफ़न
क्यूँ
है
अगर
दौलत
ख़ुशी
का
है
नया
में'यार
अमीरों
की
जबीं
पे
यह
शिकन
क्यूँ
है
ये
माना
है
मोहब्बत
भी
है
इक
नेकी
तो
इस
में
बेवफ़ाई
का
चलन
क्यूँ
है
मुझे
तो
वो
मिला
है
जो
मुक़द्दर
था
मिरे
अपनों
को
मुझ
से
फिर
जलन
क्यूँ
है
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Meem Alif Shaz
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