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Meem Alif Shaz
chaand gauhar gulaab mushk ghazal
chaand gauhar gulaab mushk ghazal | चाँद गौहर गुलाब मुश्क ग़ज़ल
- Meem Alif Shaz
चाँद
गौहर
गुलाब
मुश्क
ग़ज़ल
इन
से
अच्छा
तुम्हारा
नाम
नहीं
- Meem Alif Shaz
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रास्ता
भूल
के
आ
निकले
हैं
हम
तेरे
लोग
नहीं
थे
दुनिया
Ashraf Yousafi
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अपनी
दीवानगी
से
डरता
हूँ
दिल
तो
होता
है
दिल
लगाने
को
Vikram Gaur Vairagi
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किस
से
उम्मीद
करें
कोई
इलाज-ए-दिल
की
चारा-गर
भी
तो
बहुत
दर्द
का
मारा
निकला
Lutf Ur Rahman
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ये
ऐसा
है
वो
वैसा
है
इन
सब
सेे
तुमको
मतलब
क्या
या
सब
सेे
मतलब
रखना
है
तो
हम
सेे
मतलब
मत
रक्खो
Nirbhay Nishchhal
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किस
तरह
'अमानत'
न
रहूँ
ग़म
से
मैं
दिल-गीर
आँखों
में
फिरा
करती
है
उस्ताद
की
सूरत
Amanat Lakhnavi
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रिश्तों
की
ये
नाज़ुक
डोरें
तोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं,
अपनी
आँखें
दुखती
हों
तो
फोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
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Subhan Asad
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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जहाँ
से
लौटना
मुमकिन
नहीं
है
कुछ
ऐसे
मोड़
हैं
उसके
बदन
में
Siddharth Saaz
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ग़ुस्से
में
भींच
लेता
है
बाँहों
में
अपनी
वो
क्या
सोचना
है
फिर
उसे
ग़ुस्सा
दिलाइए
Pooja Bhatia
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मुमकिना
फ़ैसलों
में
एक
हिज्र
का
फ़ैसला
भी
था
हमने
तो
एक
बात
की
उसने
कमाल
कर
दिया
Parveen Shakir
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ज़िंदगी
तुझ
को
दिल
से
न
चाहा
मगर
बन्दगी
के
लिए
चाहना
ही
पड़ा
Meem Alif Shaz
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इस
दरिया
को
इतना
तो
समझाने
दे
मेरी
कश्ती
को
भी
किनारे
आने
दे
आज़ादी
से
तुझ
को
मोहब्बत
है
तो
फिर
सारे
परिंदों
को
अपने
घर
जाने
दे
तेरी
आँखों
में
इक
शाम
सुहानी
है
उस
मनज़र
की
इक
तस्वीर
बनाने
दे
मिलता
नहीं
जब
तुझ
को
भी
कोई
इंसाफ़
अपनी
ग़ज़लों
को
आवाज़
उठाने
दे
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Meem Alif Shaz
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तमाशा
ख़त्म
होने
को
है
नफ़रत
का
ग़ज़ल
कहने
लगे
हैं
सब
मोहब्बत
की
Meem Alif Shaz
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अपने
ग़म
के
मज़ार
पे
जाता
हूँ
मैं
फिर
ख़ुद
को
बेहद
तन्हा
पाता
हूँ
मैं
Meem Alif Shaz
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ग़म
के
टुकड़े
बिखरे
पड़े
हैं
चारों
तरफ़
मैं
अपने
ख़्वाबों
का
मलबा
ढूँढूँ
कहाँ
Meem Alif Shaz
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