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Meem Alif Shaz
is dariyaa ko itnaa to samjhaane de
is dariyaa ko itnaa to samjhaane de | इस दरिया को इतना तो समझाने दे
- Meem Alif Shaz
इस
दरिया
को
इतना
तो
समझाने
दे
मेरी
कश्ती
को
भी
किनारे
आने
दे
आज़ादी
से
तुझ
को
मोहब्बत
है
तो
फिर
सारे
परिंदों
को
अपने
घर
जाने
दे
तेरी
आँखों
में
इक
शाम
सुहानी
है
उस
मनज़र
की
इक
तस्वीर
बनाने
दे
मिलता
नहीं
जब
तुझ
को
भी
कोई
इंसाफ़
अपनी
ग़ज़लों
को
आवाज़
उठाने
दे
- Meem Alif Shaz
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कोई
कहता
था
समुंदर
हूँ
मैं
और
मिरी
जेब
में
क़तरा
भी
नहीं
Kaifi Azmi
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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कौन
डूबेगा
किसे
पार
उतरना
है
'ज़फ़र'
फ़ैसला
वक़्त
के
दरिया
में
उतर
कर
होगा
Ahmad Zafar
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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कोई
समुन्दर,
कोई
नदी
होती,
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता?
Tehzeeb Hafi
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दरिया
की
वुसअतों
से
उसे
नापते
नहीं
तन्हाई
कितनी
गहरी
है
इक
जाम
भर
के
देख
Adil Mansuri
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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हैरत
से
जो
यूँँ
मेरी
तरफ़
देख
रहे
हो
लगता
है
कभी
तुम
ने
समुंदर
नहीं
देखा
Aanis Moin
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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वो
मुझे
बर्बाद
करना
चाहता
है
नासमझ
है
जब
ख़ुदा
आबाद
करना
चाहता
है
नासमझ
है
Meem Alif Shaz
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बारिश
अक्सर
ज़ख़्म
भी
तो
लाती
है
जिन
के
कच्चे
घर
हैं
उन
से
पूछो
Meem Alif Shaz
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उनका
हम
से
नफ़रत
करने
का
अंदाज़
अजब
है
यारों
ज़िक्र
हमारा
होते
ही
वो
उठ
जाते
हैं
चले
जाते
हैं
Meem Alif Shaz
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तेरे
बदन
पर
भी
शफ़क़
आने
लगी
तू
ही
बता
अब
कौन
चाहेगा
तुझे
Meem Alif Shaz
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अब
शहर
भी
वीरान
सा
है
क्या
करें
चहरे
से
रेगिस्तान
सा
है
क्या
करें
दिल
से
मोहब्बत
टूट
के
गिर
ही
गई
हर
कोई
अब
हैरान
सा
है
क्या
करें
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Meem Alif Shaz
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