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Meem Alif Shaz
do gaz zameen sab ko milegi phir bhi log
do gaz zameen sab ko milegi phir bhi log | दो गज़ ज़मीं सब को मिलेगी फिर भी लोग
- Meem Alif Shaz
दो
गज़
ज़मीं
सब
को
मिलेगी
फिर
भी
लोग
क्यूँ
लड़
रहे
हैं
यूँँ
ज़मीनों
के
लिए
- Meem Alif Shaz
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मोहब्बत
एक
ख़ुशबू
है
हमेशा
साथ
चलती
है
कोई
इंसान
तन्हाई
में
भी
तन्हा
नहीं
रहता
Bashir Badr
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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मिरी
ज़बान
के
मौसम
बदलते
रहते
हैं
मैं
आदमी
हूँ
मिरा
ए'तिबार
मत
करना
Asim Wasti
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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क्या
लोग
हैं
कि
दिल
की
गिरह
खोलते
नहीं
आँखों
से
देखते
हैं
मगर
बोलते
नहीं
Akhtar Hoshiyarpuri
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जो
लोग
ख़ुद
न
करते
थे
होंठों
से
पान
साफ़
पलकों
से
कर
रहे
हैं
तेरा
पायदान
साफ़
Charagh Sharma
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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यार
तस्वीर
में
तन्हा
हूँ
मगर
लोग
मिले
कई
तस्वीर
से
पहले
कई
तस्वीर
के
बा'द
Umair Najmi
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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ज़िम्मेदारी
कितनी
ज़ालिम
है
हम
को
घर
से
बाहर
रखती
है
Meem Alif Shaz
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तुम
चलते
चलते
क्यूँ
रुक
जाते
हो
अपने
ग़म
को
बाहर
क्यूँ
लाते
हो
जब
उम्मीद
नहीं
उस
के
आने
की
हर
वादे
से
ठोकर
क्यूँ
खाते
हो
जब
दुनिया
सुनती
ही
नहीं
ख़ामोशी
तुम
इतनी
ख़ामोशी
क्यूँ
गाते
हो
शीशे
से
बातें
करते
हो
लेकिन
मेरे
लिए
पत्थर
क्यूँ
बन
जाते
हो
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Meem Alif Shaz
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भरौसा
तो
नहीं
तोड़ा
कभी
भी
मगर
मुझ
को
उसी
ने
तोड़
ड़ाला
Meem Alif Shaz
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किस
की
ख़ातिर
तुम
ने
मुझ
को
छोड़
दिया
है
मेरी
ख़ुशी
को
किधर
अब
तुम
ने
मोड़
दिया
है
मेरे
ख़्वाबों
का
घर
पूरा
होने
को
था
और
अचानक
तुम
ने
उस
को
तोड़
दिया
है
जो
ग़म
सालों
से
बस
बिखरे
बिखरे
से
थे
अपनी
ख़ातिर
उनको
फिर
से
जोड़
दिया
है
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Meem Alif Shaz
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मेरे
बच्चों
कहाँ
आ
गए
तुम
मुफलिसी
नोच
लेगी
सभी
को
Meem Alif Shaz
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