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Meem Alif Shaz
dariche pe nazar aaya tira jalwa
dariche pe nazar aaya tira jalwa | दरीचे पे नज़र आया तिरा जलवा
- Meem Alif Shaz
दरीचे
पे
नज़र
आया
तिरा
जलवा
सितारे
जब
नज़र
आए
तिरे
ही
साथ
- Meem Alif Shaz
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सलीक़ा
तो
नहीं
मालूम
हम
को
दीद
का
लेकिन
झुकाती
है
नज़र
को
जब
नज़र
भर
देखते
हैं
हम
Sandeep dabral 'sendy'
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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लाई
न
ऐसों-वैसों
को
ख़ातिर
में
आज
तक
ऊँची
है
किस
क़दर
तिरी
नीची
निगाह
भी
Firaq Gorakhpuri
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माँ
जैसे
देखती
हो
तुम
मगर
मैं
तुम्हारी
आँख
का
तारा
नहीं
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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शाम
से
आँख
में
नमी
सी
है
आज
फिर
आप
की
कमी
सी
है
Gulzar
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हुस्न
को
हुस्न
बनाने
में
मिरा
हाथ
भी
है
आप
मुझ
को
नज़र-अंदाज़
नहीं
कर
सकते
Rais Farog
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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तुम्हें
देखे
ज़माना
हो
गया
है
नज़र
महके
ज़माना
हो
गया
है
बिछड़के
तुम
सेे
आँखें
बुझ
गई
हैं
ये
दिल
धड़के
ज़माना
हो
गया
है
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Subhan Asad
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क्यूँँ
इक
तरफ़
निगाह
जमाए
हुए
हो
तुम
क्या
राज़
है
जो
मुझ
से
छुपाए
हुए
हो
तुम
Shakeel Badayuni
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अपनी
आँखों
से
किसी
दिन
यह
तमाशा
देखना
दर्द
में
रोते
हुए
ख़ुद
को
ही
तन्हा
देखना
पहले
तुम
सीखो
ज़रा
तैराकी
का
हर
इक
हुनर
साथ
चलते
चलते
फिर
हर
एक
दरिया
देखना
"शाज़"
घर
से
दूर
तो
बस
अजनबी
ही
मिलते
हैं
जब
कभी
घर
जाओ
तो
कोई
शनासा
देखना
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Meem Alif Shaz
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गाँव
भी
छोड़ा,
इश्क़
भी
छोड़ा,
माँ
भी
छोड़ी
इस
रोज़ी
की
ख़ातिर
हम
ने
क्या
क्या
छोड़ा
Meem Alif Shaz
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जब
आए
हो
तो
दो
बातें
मीठी
हो
जाए
तुम
पीछे
तो
बुराई
अकसर
करते
रहते
हो
Meem Alif Shaz
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हम
तो
कलेजा
थाम
के
बैठे
हैं
इक
और
नया
ग़म
आता
ही
होगा
Meem Alif Shaz
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हम
कभी
रोते
नहीं
जब
याद
तेरी
आती
है
तू
यक़ीनन
लौट
के
आएगी
मौसम
की
तरह
Meem Alif Shaz
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