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Meem Alif Shaz
amaanat men khyaanat lutf deti hai
amaanat men khyaanat lutf deti hai | अमानत में ख़यानत लुत्फ़ देती है
- Meem Alif Shaz
अमानत
में
ख़यानत
लुत्फ़
देती
है
मगर
इज़्ज़त
भी
सारी
छीन
लेती
है
- Meem Alif Shaz
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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अना
को
अपनी
समझाना
पड़ेगा
बुलाती
है,
तो
फिर
जाना
पड़ेगा
Salman Zafar
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लड़
सको
दुनिया
से
जज़्बों
में
वो
शिद्दत
चाहिए
इश्क़
करने
के
लिए
इतनी
तो
हिम्मत
चाहिए
कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
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Nadeem Shaad
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चादर
की
इज़्ज़त
करता
हूँ
और
पर्दे
को
मानता
हूँ
हर
पर्दा
पर्दा
नइँ
होता
इतना
मैं
भी
जानता
हूँ
Ali Zaryoun
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ज़िंदा
रहने
की
ये
तरक़ीब
निकाली
हमने
बात
बिगड़ी
हुई
कुछ
ऐसे
सँभाली
हमने
उस
सेे
समझौता
किया
है
उसी
की
शर्तों
पे
जान
भी
बच
गई
इज़्ज़त
भी
बचा
ली
हमने
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Divyansh Shukla
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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हम
ने
क़ुबूल
कर
लिया
अपना
हर
एक
जुर्म
अब
आप
भी
तो
अपनी
अना
छोड़
दीजिए
Harsh saxena
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
Nadeem Shaad
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अगर
तुम्हारी
अना
ही
का
है
सवाल
तो
फिर
चलो
मैं
हाथ
बढ़ाता
हूँ
दोस्ती
के
लिए
Ahmad Faraz
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रात
कब
जाएगी
मरीज़
पूछे
ज़िन्दगी
तो
उसकी
बिखर
गई
है
Meem Alif Shaz
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चराग़ों
मुस्कुराने
से
नहीं
डरना
हवा
से
हो
गई
है
अब
शनासाई
Meem Alif Shaz
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खोलो
मत
ज़ुल्फ़े
रौशनी
में
ऐसे
बारिश
होना
जाए
बिना
मौसम
के
Meem Alif Shaz
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ज़माने
को
ख़बर
होती
नहीं
है
ज़माना
फिर
भी
सब
कुछ
जानता
है
Meem Alif Shaz
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बारिश
अक्सर
ज़ख़्म
भी
तो
लाती
है
जिन
के
कच्चे
घर
हैं
उन
से
पूछो
Meem Alif Shaz
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