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Meem Alif Shaz
aaj main us ko zara chhup kar bhi dekhooñ
aaj main us ko zara chhup kar bhi dekhooñ | आज मैं उस को ज़रा छुप कर भी देखूँ
- Meem Alif Shaz
आज
मैं
उस
को
ज़रा
छुप
कर
भी
देखूँ
वो
हक़ीक़त
में
मुझे
दिखती
है
कैसी
- Meem Alif Shaz
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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किसी
के
झूठ
से
पर्दा
हटाकर
हमारा
सच
बहुत
रोया
था
उस
दिन
Shadab Asghar
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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मोहब्बत
को
छुपाए
लाख
कोई
छुप
नहीं
सकती
ये
वो
अफ़्साना
है
जो
बे-कहे
मशहूर
होता
है
Lala Madhav Ram Jauhar
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दीवारें
छोटी
होती
थीं
लेकिन
पर्दा
होता
था
तालों
की
ईजाद
से
पहले
सिर्फ़
भरोसा
होता
था
Azhar Faragh
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ये
गहरा
राज़
है
इसका
बदन
को
खा
ही
जाती
है
मोहब्बत
पाक
होकर
भी
हवस
तक
आ
ही
जाती
है
ALI ZUHRI
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तेरी
आँखों
में
जो
इक
क़तरा
छुपा
है,
मैं
हूँ
जिसने
छुप
छुप
के
तेरा
दर्द
सहा
है,
मैं
हूँ
एक
पत्थर
कि
जिसे
आँच
न
आई,
तू
है
एक
आईना
कि
जो
टूट
चुका
है,
मैं
हूँ
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Fauziya Rabab
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मैं
छुप
रहा
हूँ
कि
जाने
किस
दम
उतार
डाले
लिबास
मुझ
को
Aziz Nabeel
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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सब
ने
माना
मरने
वाला
दहशत-गर्द
और
क़ातिल
था
माँ
ने
फिर
भी
क़ब्र
पे
उस
की
राज-दुलारा
लिक्खा
था
Ahmad Salman
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समुंदर
की
तरह
बहता
गया
हूँ
मैं
किनारे
की
तरह
तुम
मिल
गई
हो
फिर
Meem Alif Shaz
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मिली
जब
उन
की
बातों
में
मिलावट
मिरे
दिल
ने
कहा
दूरी
बनालो
Meem Alif Shaz
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परिंदे
हैं
नए
साथी
हमारे
सभी
अपने
पराए
हो
गए
हैं
Meem Alif Shaz
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हम
दोनों
तो
यूँँही
बैठे
हैं
टेबल
पर
जिस
से
मोहब्बत
है
वो
तो
कोई
और
ही
है
Meem Alif Shaz
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तेरी
आँखों
में
सारे
मनज़र
हैं
हम
कहाँ
हैं,
कहाँ
थे,
कब
होंगे
Meem Alif Shaz
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