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Meem Alif Shaz
tishnagi ne bahut hi thakaaya to phir
tishnagi ne bahut hi thakaaya to phir | तिश्नगी ने बहुत ही थकाया तो फिर
- Meem Alif Shaz
तिश्नगी
ने
बहुत
ही
थकाया
तो
फिर
दरिया
से
तुम
को
कुछ
मिल
न
पाया
तो
फिर
दोस्त
की
जो
मोहब्बत
है
छीनो
नहीं
दोस्ती
में
रफ़ू
हो
न
पाया
तो
फिर
इश्क़
में
बेवफ़ाई
न
करना
कभी
उस
ने
सब
से
ही
वा'दा
निभाया
तो
फिर
ग़ुस्से
को
मत
उछालो
इधर
से
उधर
गर
ज़माने
ने
तुम
को
घुमाया
तो
फिर
- Meem Alif Shaz
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हैराँ
मैं
भी
हूँ
दोस्त
यूँँ
बालों
में
गजरा
देखकर
ये
फूल
आख़िर
कबसे
फूलों
को
पहनने
लग
गया
Neeraj Neer
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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एक
सीता
की
रिफ़ाक़त
है
तो
सब
कुछ
पास
है
ज़िंदगी
कहते
हैं
जिस
को
राम
का
बन-बास
है
Hafeez Banarasi
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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क़फस
उदास
है
यारों
सबास
कुछ
तो
कहो
कहीं
तो
बहरे-खुदा
आज
ज़िक्र-ए-यार
चले
Faiz Ahmad Faiz
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कहाँ
की
दोस्ती
किन
दोस्तों
की
बात
करते
हो
मियाँ
दुश्मन
नहीं
मिलता
कोई
अब
तो
ठिकाने
का
Waseem Barelvi
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यार
बिछड़कर
तुमने
हँसता
बसता
घर
वीरान
किया
मुझको
भी
आबाद
न
रक्खा
अपना
भी
नुक़्सान
किया
Ali Zaryoun
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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अपनी
बाँहो
से
क्यूँँ
हटाऊँ
उसे
सो
रहा
है
तो
क्यूँँ
जगाऊँ
उसे
जो
भी
मिलता
है
उसका
पूछता
है
यार
किस
किस
से
मैं
छुपाऊँ
उसे
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Kafeel Rana
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दिल
की
तमन्ना
थी
मस्ती
में
मंज़िल
से
भी
दूर
निकलते
अपना
भी
कोई
साथी
होता
हम
भी
बहकते
चलते
चलते
Majrooh Sultanpuri
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कोई
साया
नहीं
है
अब
मिरे
सर
पर
कभी
मिलने
नहीं
आना
मिरे
घर
पर
तुझे
कैसे
भुला
दूँ
एक
दो
दिन
में
तिरे
जलवे
नज़र
आते
हैं
बिस्तर
पर
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Meem Alif Shaz
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अगर
हम
देख
लें
तुझ
को
यूँँ
जी
भर
के
हमारी
आँखों
की
मज़दूरी
हो
जाए
Meem Alif Shaz
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हम
बदलने
में
यक़ीं
रखते
हैं
साहिब
हम
को
तो
मालूम
है
इंसानी
फ़ितरत
Meem Alif Shaz
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यह
दुनिया
जब
तुम
को
डराने
लग
जाए
एक
समुंदर
को
उस्ताद
बना
लेना
Meem Alif Shaz
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मैं
तेरे
ज़ख़्मों
पे
मरहम
ख़ुद
ही
लगा
तो
देता
लेकिन
अपने
ज़ख़्मों
पे
ही
सारा
मरहम
ख़त्म
हुआ
था
उस
दिन
Meem Alif Shaz
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