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Meem Alif Shaz
chaanv bikhri thii magar saaya nahin tha
chaanv bikhri thii magar saaya nahin tha | छाँव बिखरी थी मगर साया नहीं था
- Meem Alif Shaz
छाँव
बिखरी
थी
मगर
साया
नहीं
था
ऐसे
भी
गुज़रेगी
यह
सोचा
नहीं
था
हम
से
वो
मिलते
रहे
काफ़ी
दिनों
तक
पर
हमारा
हाल
तो
पूछा
नहीं
था
इश्क़
पहले
चल
रहा
था
जैसे
तैसे
मिलना
लेकिन
इतना
भी
महॅंगा
नहीं
था
मौत
पहले
भी
यहाँ
आती
थी
लेकिन
यूँँ
अचानक
आने
का
धोका
नहीं
था
दरिया
में
पानी
था
पर
हम
पी
न
पाएँ
घूस
के
बिन
जाने
का
रस्ता
नहीं
था
सोचा
करते
थे
ख़रीदारी
से
पहले
धोका
देना
इतना
भी
सस्ता
नहीं
था
ग़म
तो
था
उस
से
बिछड़ने
का
मगर
शाज़
ख़ुद-कुशी
कर
लेंगे
यह
सोचा
नहीं
था
- Meem Alif Shaz
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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ये
कब
कहते
हैं
कि
आकर
हमको
गले
लगा
ले
वो
मिल
जाए
तो
रस्मन
ही
बस
हाथ
मिला
ले
काफ़ी
है
इतने
कहाँ
नसीब
कि
इस
सेे
प्यास
बुझाएँ
खेल
करें
दरिया
हम
जैसों
को
अपने
पास
बिठा
ले
काफ़ी
है
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Vashu Pandey
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रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
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मेरे
जुनूँ
का
नतीजा
ज़रूर
निकलेगा
इसी
सियाह
समुंदर
से
नूर
निकलेगा
Ameer Qazalbash
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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ज़रा
पाने
की
चाहत
में
बहुत
कुछ
छूट
जाता
है
नदी
का
साथ
देता
हूँ
समुंदर
रूठ
जाता
है
Aalok Shrivastav
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कभी
दरिया
में
जिनकी
कश्तियाँ
थी
वही
अब
साहिलों
पे
रो
रहे
हैं
Siddharth Saaz
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इक
मुहब्बत
से
भरी
उस
ज़िंदगी
के
ख़्वाब
हैं
पेड़
दरिया
और
पंछी
तेरे
मेरे
ख़्वाब
हैं
Neeraj Nainkwal
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वो
इतना
शांत
दरिया
था
मगर
जब
गया
तो
ले
गया
सब
कुछ
बहा
के
Siddharth Saaz
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बातचीत
में
आला
हो
बस
ठीक
न
हो
फ़ाइदा
क्या
महबूब
अगर
बारीक
न
हो
हम
तेरी
क़ुर्बत
में
अक्सर
सोचते
हैं
दरिया
खेत
के
इतना
भी
नज़दीक
न
हो
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Khurram Afaq
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रात
दिन
इक
यही
तो
गिला
है
तुझे
ज़िन्दगी
में
बहुत
कम
मिला
है
तुझे
Meem Alif Shaz
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भुलाना
तो
पड़ेगा
ग़म
को
लेकिन
नए
ग़म
को
छुपाना
भी
पड़ेगा
Meem Alif Shaz
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जब
हम
ने
अपने
ग़म
को
भुलाया
उस
के
बाद
सब
ने
बातों
का
तीर
चलाया
उस
के
बाद
पहले
तो
ज़िद
की
थोड़ी
सी
रिश्वत
लेलो
जब
लेली
तो
लोगों
को
बताया
उस
के
बाद
हम
ग़ैरों
से
लाए
थे
कुछ
सच्चे
रिश्ते
अपनो
ने
तो
उन
को
भी
सताया
उस
के
बाद
हम
तो
बस
ख़ुशबू
देने
गए
थे
उन
के
घर
फिर
भी
हम
को
दुश्मन
ही
बताया
उस
के
बाद
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Meem Alif Shaz
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गाँव
भी
छोड़ा,
इश्क़
भी
छोड़ा,
माँ
भी
छोड़ी
इस
रोज़ी
की
ख़ातिर
हम
ने
क्या
क्या
छोड़ा
Meem Alif Shaz
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वतन
के
लिए
हम
भी
लड़ते
अगर
हम
तुम्हारी
तरह
अपने
पैरों
से
चलते
Meem Alif Shaz
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