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jaani Aggarwal taak
aa ga.e apni ham dikhaane par
aa ga.e apni ham dikhaane par | आ गए अपनी हम दिखाने पर
- jaani Aggarwal taak
आ
गए
अपनी
हम
दिखाने
पर
अक़्ल
आ
जाएगी
ठिकाने
पर
पहले
झाँको
गिरेबाँ
ख़ुद
का
तुम
बाद
उसके
कहो
ज़माने
पर
सोचता
हूँ
उसे
फँसा
लूँगा
पर
वो
आता
नहीं
निशाने
पर
- jaani Aggarwal taak
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अब
इरादा
वस्ल
का
बाक़ी
नहीं
फ़ुर्क़तों
में
उम्र
सारी
लग
गई
jaani Aggarwal taak
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उसका
चेहरा
याद
नहीं
कुछ
भी
अच्छा
याद
नहीं
बैठ
गया
हूँ
महफ़िल
में
अपना
लिक्खा
याद
नहीं
सोच
रहा
हूँ
घंटों
से
मुझ
को
क्या-क्या
याद
नहीं
फ़क़त
बिछड़ना
याद
रहा
अव्वल
मिलना
याद
नहीं
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jaani Aggarwal taak
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भुला
दूँ
कोशिशें
पूरी
बना
ली
है
मुसलसल
आदतें
ऐसी
बना
ली
है
तुम्हारी
ही
तरह
हम
ने
बिछड़ने
का
इरादा
कर
लिया
दूरी
बना
ली
है
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jaani Aggarwal taak
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भुला
के
दर्द
सारा
ज़िन्दगी
में
लौट
आते
अगर
वो
शख़्स
मिलता
आशिक़ी
में
लौट
आते
किसी
से
प्रेम
है
मुझको
मधुमक्खी
के
जैसा
भगा
लो
जितना
चाहे
चाशनी
में
लौट
आते
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jaani Aggarwal taak
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है
परेशानी
मगर
अब
क्या
करें,
रास्ते
में
हैं
ख़बर
अब
क्या
करें
घर
पे
बैठी
कर
रही
वो
इंतिजार
हो
रही
बेचैन
पर
अब
क्या
करें
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jaani Aggarwal taak
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