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Irshad Siddique "Shibu"
nahin tu nahin shef is des men re chidaiya
nahin tu nahin shef is des men re chidaiya | नहीं तू नहीं शेफ इस देस में रे चिड़ैया
- Irshad Siddique "Shibu"
नहीं
तू
नहीं
शेफ
इस
देस
में
रे
चिड़ैया
दरिंदे
हैं
इंसान
के
भेस
में
रे
चिड़ैया
- Irshad Siddique "Shibu"
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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कुछ
लोग
ख़यालों
से
चले
जाएँ
तो
सोएँ
बीते
हुए
दिन
रात
न
याद
आएँ
तो
सोएँ
Habib Jalib
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ठहाका
मार
कर
हथियार
हँसते
नहीं
जीतेंगे
अब
इंसान
हम
सेे
Umesh Maurya
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ये
लोग
कौन
हैं
आख़िर
कहाँ
से
आते
हैं
जो
जिस्म
नोच
के
फिर
बेटियाँ
जलाते
हैं
Shajar Abbas
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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हम
तो
सुनते
थे
कि
मिल
जाते
हैं
बिछड़े
हुए
लोग
तू
जो
बिछड़ा
है
तो
क्या
वक़्त
ने
गर्दिश
नहीं
की
Ambreen Haseeb Ambar
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बस-कि
दुश्वार
है
हर
काम
का
आसाँ
होना
आदमी
को
भी
मुयस्सर
नहीं
इंसाँ
होना
Mirza Ghalib
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चंद
पैसे
क्या
कमाने
लग
गए
लोग
आलिम
को
पढ़ाने
लग
गए
जान
जिनपे
हम
लुटाने
लग
गए
वो
भी
हमको
ही
मिटाने
लग
गए
वो
हमेशा
से
जो
मेरे
पास
था
उसको
पाने
में
ज़माने
लग
गए
जिनके
आँसू
पोछे
मैंने
आँखों
के
वो
मुझे
आँखें
दिखाने
लग
गए
बाप
का
सर
से
जो
साया
क्या
उठा
ग़म
के
साए
हक़
जताने
लग
गए
रस्ता
जिनको
भी
बताया
मैंने
वो
मुझको
ही
रस्ता
दिखाने
लग
गए
ख़ुद
को
अब
भी
ढूँढने
में
हूँ
लगा
दोस्त
सब
मेरे
कमाने
लग
गए
वो
जो
मेरे
क़त्ल
के
साज़िश
में
थे
मुझ
को
देखा
मुस्कुराने
लग
गए
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Irshad Siddique "Shibu"
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दिखावा
ही
अगर
सच्ची
मोहब्बत
है
तो
सॉरी
ये
मोहब्बत
हम
नहीं
करते
Irshad Siddique "Shibu"
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जा
के
कोइ
शहरे
गरीबां
से
कह
दो
ख़ुदा
को
मैं
मुझको
ख़ुदा
जानता
है
Irshad Siddique "Shibu"
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कि
एक
फल
किसी
के
सर
पे
क्या
गिरा
कि
सारे
पेड़
ही
गिरा
दिए
गए
Irshad Siddique "Shibu"
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कि
ग़म
को
इस
तरह
से
हम
चिढ़ाते
हैं
हो
कितना
दर्द,
फिर
भी
मुस्कुराते
हैं
Irshad Siddique "Shibu"
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