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Irshad Siddique "Shibu"
jo KHud se uth kar peeta naiiñ tha paani ko
jo KHud se uth kar peeta naiiñ tha paani ko | जो ख़ुद से उठ कर पीता नईं था पानी को
- Irshad Siddique "Shibu"
जो
ख़ुद
से
उठ
कर
पीता
नईं
था
पानी
को
अब
कांधे
पे
ढोता
है
ज़िम्मेदारी
को
उसको
देख
के
ख़्वाब
में
हम
ऐसे
तड़पे
हैं
जैसे
तड़पे
है
कोई
प्यासा
पानी
को
धक्के
खाए
जिसने
सारी
उम्र
बसों
में
उसने
कार
दिया
है
अपनी
शहज़ादी
को
- Irshad Siddique "Shibu"
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चूमने
की
रस्म
बाक़ी
है
अभी
भी
डर
है
पहले
देह
को
उबटन
न
चू
में
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Neeraj Neer
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जो
यहाँ
ख़ुद
ही
लगा
रक्खी
है
चारों
जानिब
एक
दिन
हम
ने
इसी
आग
में
जल
जाना
है
Zafar Iqbal
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क्या
कहा
दोस्त
समझना
है
तुम्हें
प्यार
नहीं
यानी
बस
देखना
है
पानी
को
पीना
नहीं
है
Neeraj Neer
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हो
गए
राम
जो
तुम
ग़ैर
से
ए
जान-ए-जहाँ
जल
रही
है
दिल-ए-पुर-नूर
की
लंका
देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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जल
चुका
है
जिस्म
मेरा
राख
हूँ
मैं
पर
मुझे
अब
भी
मिली
राहत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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ऐसा
बदला
हूँ
तिरे
शहर
का
पानी
पी
कर
झूट
बोलूँ
तो
नदामत
नहीं
होती
मुझ
को
Shahid Zaki
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मुझ
सेे
मिलने
ही
आती
है
नुक्कड़
पर
पानी
पूरी
केवल
एक
बहाना
है
Divy Kamaldhwaj
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आज
आख़िरी
दफ़ा
था
पानी
से
पेट
भरना
बच्चों
ने
आज
जाके
घर
में
अनाज
देखा
Amaan Pathan
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पेड़
के
काटने
वालों
को
ये
मालूम
तो
था
जिस्म
जल
जाएँगे
जब
सर
पे
न
साया
होगा
Kaifi Azmi
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रात
भर
ता'रीफ़
मैंने
की
तुम्हारे
रूप
की
चाँद
इतना
जल
गया
सुनकर
कि
सूरज
हो
गया
Chandan Rai
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धक्के
खाए
जिसने
सारी
उम्र
बसों
में
उसने
कार
दिया
है
अपनी
शहज़ादी
को
Irshad Siddique "Shibu"
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तिरे
माथे
पे
इक
सिंदूर
के
जानाँ
जहाँ
में
कुछ
भी
मेरे
नाम
का
नइँ
है
Irshad Siddique "Shibu"
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कि
जब
भी
तुझे
कम
मुहब्बत
लगेगी
तुझे
तब
हमारी
ज़रूरत
लगेगी
बहुत
क़हर
है
सादगी
यार
उसकी
वो
दुल्हन
बनी
तो
क़यामत
लगेगी
करोगी
मुहब्बत
से
आज़ाद
जब
तुम
मुझे
तब
नशे
की
बहुत
लत
लगेगी
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साहब
हम
जिस
दिन
से
कमाने
लग
जाऍंगे
ये
चार
लोग
भी
पाॅंव
दबाने
लग
जाऍंगे
मेरी
ओर
ख़़ुदा-रा
यूँॅं
ना
देखा
कीजे
लोग
वगरना
बात
बनाने
लग
जाऍंगे
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Irshad Siddique "Shibu"
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तू
ये
तो
देख
तू
रोता
कहाँ
हैं
बुतों
के
पास
दिल
रहता
कहाँ
हैं
सभी
दुनिया
में
अपने
दिखते
हैं
बस
यहाँ
अपना
कोई
होता
कहाँ
हैं
ख़ुशी
में
मेला
सा
लगता
है
घर
पे
ग़मों
में
मेला
ये
लगता
कहाँ
है
कि
जब
भी
आतीं
हैं
यादें
किसी
की
समुंदर
आँखों
का
रुकता
कहाँ
हैं
बयाँ
किस
सेे
करूँँ
मैं
दर्द
अपना
किसी
की
कोइ
अब
सुनता
कहाँ
है
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Irshad Siddique "Shibu"
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