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Ajay Kumar
jab bhi aankhoñ ka haal dekha hai
jab bhi aankhoñ ka haal dekha hai | जब भी आँखों का हाल देखा है
- Ajay Kumar
जब
भी
आँखों
का
हाल
देखा
है
इन
में
बसता
मलाल
देखा
है
हम
ने
हर
बार
तेरे
चेहरे
पर
सादगी
का
कमाल
देखा
है
मौत
इतनी
क़रीब
आई
थी
ज़िंदगी
का
जमाल
देखा
है
क्या
बुरा
वक़्त
झेल
पाओगे
तुमने
तो
मेरा
हाल
देखा
है
लीडरों
की
ज़बान
क्या
देखें
लीडरों
का
कमाल
देखा
है
ख़ैर
ये
दिन
भी
देख
लेते
हैं
ग़म
भरा
एक
साल
देखा
है
- Ajay Kumar
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आदमी
उम्र
को
घटाता
है
चेहरा
है
सिलवटें
दिखाता
है
मुझको
मेरे
ख़राब
होने
का
बेसबब
ही
ख़याल
आता
है
कोई
रिश्ता
हो
तो
निभाऊँ
मैं
कौन
ही
हादसा
निभाता
है
ख़ुद-कुशी
ने
किवाड़
खोले
हैं
और
वो
रस्सियाँ
बनाता
है
एक
ही
रंग
पे
निगाहें
हैं
एक
ही
रंग
मुझको
भाता
है
आपको
देखना
मुनासिब
है
आपका
मुझ
सेे
एक
नाता
है
अच्छे
लोगों
से
बात
होती
थी
अब
मुझे
कौन
ही
बुलाता
है
मैं
मुकम्मल
उदास
रहता
हूँ
एक
दुख
ऐसे
मुझको
खाता
है
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Ajay Kumar
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लाश
बनते
हुए
परिंदों
को
देख
सह
में
हुए
परिंदों
को
क्या
उदासी
का
इल्म
होता
है
दूर
उड़ते
हुए
परिंदों
को
ये
बड़े
दिन
के
बाद
देखा
है
इतना
हँसते
हुए
परिंदों
को
पागलों
सा
पुकारता
हूँ
मैं
आते
जाते
हुए
परिंदों
को
ऊँची
परवाज़
का
सिला
क्या
है
पूछ
उजड़े
हुए
परिंदों
को
ज़िंदगी
भर
मलाल
रहता
है
इन
बिछड़ते
हुए
परिंदों
को
ख़ैर
उड़ने
को
आसमाँ
भर
है
दुनिया
जीते
हुए
परिंदों
को
उस
तरफ़
कौन
मोह
लेता
है
मेरे
भेजे
हुए
परिंदों
को
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Ajay Kumar
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बदगुमाँ
बे-हिसाब
होते
हैं
जिनके
काले
गुलाब
होते
हैं
तेरी
यादों
के
बाद
हम
जैसे
एक
ख़ाली
किताब
होते
हैं
लोग
अक्सर
बदल
ही
जाते
हैं
लोग
कितने
ख़राब
होते
हैं
आदमी
की
तमाम
नस्लों
से
जानवर
ला-जवाब
होते
हैं
आप
अपने
हिसाब
से
रहिए
उनके
अपने
हिसाब
होते
हैं
सिलसिले
जो
मसाफ़तों
के
हों
सिलसिले
इज़्तिराब
होते
हैं
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फूल
से
धूप
का
राब्ता
हो
गया
ज़िंदगी
ख़ुश-नुमा
तजरबा
हो
गया
अजनबी
शहरस
सामना
जब
हुआ
आपके
साथ
का
हौसला
हो
गया
इक
ग़ज़ल
से
ज़रा
रू-ब-रू
क्या
हुए
उम्र
भर
का
सफ़र
मसअला
हो
गया
तुम
वहाँ
हिज्र
में
क्या
से
क्या
हो
गए
मैं
यहाँ
हिज्र
में
क्या
से
क्या
हो
गया
तेरी
मौजूदगी
का
असर
ये
हुआ
मुझको
भी
जीने
का
हौसला
हो
गया
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Ajay Kumar
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कौन
ही
सुने
ऐसे
दरकिनार
लोगों
को
सच
ख़राब
लगता
हैं
होशियार
लोगों
को
जो
गुनाह
करके
ही
कामयाब
होते
हैं
बे-शुमार
लानत
उन
माल-दार
लोगों
को
क्या
रखा
है
ऐसा
भी
ला-जवाब
जो
तुझ
में
तेरी
दीद
ही
कर
दे
बे-क़रार
लोगों
को
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Ajay Kumar
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