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Ajay Kumar
badgumaan be-hisaab hote hain
badgumaan be-hisaab hote hain | बदगुमाँ बे-हिसाब होते हैं
- Ajay Kumar
बदगुमाँ
बे-हिसाब
होते
हैं
जिनके
काले
गुलाब
होते
हैं
तेरी
यादों
के
बाद
हम
जैसे
एक
ख़ाली
किताब
होते
हैं
लोग
अक्सर
बदल
ही
जाते
हैं
लोग
कितने
ख़राब
होते
हैं
आदमी
की
तमाम
नस्लों
से
जानवर
ला-जवाब
होते
हैं
आप
अपने
हिसाब
से
रहिए
उनके
अपने
हिसाब
होते
हैं
सिलसिले
जो
मसाफ़तों
के
हों
सिलसिले
इज़्तिराब
होते
हैं
- Ajay Kumar
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किताबें
खोल
कर
बैठे
हैं
लेकिन
रिवीजन
बस
तुम्हारा
हो
रहा
है
Prateek Shukla
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रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र
का
भी
इल्म
है
लाज़िम
फ़क़त
दिल
टूट
जाने
से
कोई
शाइर
नहीं
बनता
Avtar Singh Jasser
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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बे-गिनती
बोसे
लेंगे
रुख़-ए-दिल-पसंद
के
आशिक़
तिरे
पढ़े
नहीं
इल्म-ए-हिसाब
को
Haidar Ali Aatish
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बच्चों
के
छोटे
हाथों
को
चाँद
सितारे
छूने
दो
चार
किताबें
पढ़
कर
ये
भी
हम
जैसे
हो
जाएँगे
Nida Fazli
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उतारा
दिल
के
वरक़
पर
तो
कितना
पछताया
वो
इंतिसाब
जो
पहले
बस
इक
किताब
पे
था
Aanis Moin
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जो
कुछ
मता-ए-हुनर
हो
तो
सामने
लाओ
कि
ये
ज़माना-ए-इज़हार-ए-नस्ल-ओ-रंग
नहीं
Akbar Ali Khan Arshi Zadah
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हमारा
इल्म
बूढ़ा
हो
रहा
है
किताबें
धूल
खाती
जा
रही
हैं
Kaif Uddin Khan
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बेवफ़ाई
ने
तिरी
मुझको
दिया
है
ये
हुनर
बस
यार
दुनिया
में
कहाँ
हर
भाग्य
में
ये
फ़न
लिखा
है
Harsh saxena
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जो
तेरे
बाद
भी
पत्थर
रहा
है
वो
दिल
भी
टूटने
से
डर
रहा
है
किसी
को
छोड़
के
जाऊँ
भी
कैसे
कोई
मुझ
पे
भरोसा
कर
रहा
है
सफ़र
में
मुश्किलें
होते
हुए
भी
सफ़र
में
हौसला
अक्सर
रहा
है
तुम्हारे
चाँद-चेहरे
की
चमक
से
ये
कमरा
रौशनी
से
भर
रहा
है
मोहब्बत
में
तमाशे
ही
बचे
हैं
मोहब्बत
का
सलीक़ा
मर
रहा
है
तुम्हारी
ज़िंदगी
में
हौसला
था
हमारी
ज़िंदगी
में
डर
रहा
है
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Ajay Kumar
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उनके
चेहरे
पर
सितारे
बैठे
हैं
फूल
पर
सारे
के
सारे
बैठे
हैं
एक
उसका
दुख
गले
लग
बैठा
है
और
बाक़ी
दुख
किनारे
बैठे
हैं
धूप
भी
क़दमों
तले
पामाल
है
फूल
फिर
किसके
सहारे
बैठे
हैं
एक
डायन
सारी
रौनक़
खा
गई
बे-कसी
दिल
में
उतारे
बैठे
हैं
हमको
मौसम
आज़माने
आए
हैं
हम
तो
पैरों
को
पसारे
बैठे
है
कौन
जाने
चाहने
वालों
का
दुख
चाहने
वाले
कँवारे
बैठे
हैं
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Ajay Kumar
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किसी
भी
बात
का
शिकवा
नहीं
है
हमारे
बीच
क्या
झगड़ा
नहीं
है
हमें
इक
चेहरे
की
आदत
हो
जाए
किसी
को
इतना
भी
चाहा
नहीं
है
उदासी
के
सबब
वादे
रहे
हैं
उदासी
का
सबब
धोखा
नहीं
है
हमारी
ज़ात
का
ही
मसअला
है
हमारा
मसअला
झगड़ा
नहीं
है
किसी
ने
जितनी
उम्मीदें
रखी
हैं
हमारे
पास
तो
उतना
नहीं
है
चलो
फिर
से
अकेले
ही
चलेंगे
किसी
ने
साथ
तो
आना
नहीं
है
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Ajay Kumar
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कौन
ही
सुने
ऐसे
दरकिनार
लोगों
को
सच
ख़राब
लगता
हैं
होशियार
लोगों
को
जो
गुनाह
करके
ही
कामयाब
होते
हैं
बे-शुमार
लानत
उन
माल-दार
लोगों
को
क्या
रखा
है
ऐसा
भी
ला-जवाब
जो
तुझ
में
तेरी
दीद
ही
कर
दे
बे-क़रार
लोगों
को
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Ajay Kumar
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हाथ
है
तो
सलात
होती
है
बात
करने
से
बात
होती
है
आदमी
की
ही
ज़ात
हो
ना
तुम
जो
बड़ी
वाहियात
होती
है
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Ajay Kumar
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