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Hemant Sakunde
ai KHuda koi naya kartab bataa de
ai KHuda koi naya kartab bataa de | ऐ ख़ुदा कोई नया कर्तब बता दे
- Hemant Sakunde
ऐ
ख़ुदा
कोई
नया
कर्तब
बता
दे
इस
पुराने
नाच
से
मन
उठ
गया
है
- Hemant Sakunde
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ये
तुमने
कैसा
बना
कर
हमें
किया
है
गुम
ख़ुशी
से
झूम
उठेगा
जिसे
मिलेंगे
हम
Swapnil Tiwari
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कुछ
इशारा
जो
किया
हम
ने
मुलाक़ात
के
वक़्त
टाल
कर
कहने
लगे
दिन
है
अभी
रात
के
वक़्त
Insha Allah Khan
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देख
ज़िंदाँ
से
परे
रंग-ए-चमन
जोश-ए-बहार
रक़्स
करना
है
तो
फिर
पाँव
की
ज़ंजीर
न
देख
Majrooh Sultanpuri
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रक़्स
करना
है
तो
फिर
होश
की
पाज़ेब
उतार
आलम-ए-वज्द
में
ही
बे-ख़बरी
आती
है
Rajesh Reddy
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रखी
थी
ले
के
कॉपी
हम
ने
उसकी
ख़ुशी
से
झूम
उठा
बस्ता
हमारा
Ankit Maurya
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तुम्हारी
याद
के
गहरे
भँवर
में
तख़य्युल
रक़्स
करना
चाहता
है
Gaurav Singh
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ये
किस
ने
फ़ोन
पे
दी
साल-ए-नौ
की
तहनियत
मुझ
को
तमन्ना
रक़्स
करती
है
तख़य्युल
गुनगुनाता
है
Ali Sardar Jafri
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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क़र्ज़
की
पीते
थे
मय
लेकिन
समझते
थे
कि
हाँ
रंग
लावेगी
हमारी
फ़ाक़ा-मस्ती
एक
दिन
Mirza Ghalib
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किस
ने
भीगे
हुए
बालों
से
ये
झटका
पानी
झूम
के
आई
घटा
टूट
के
बरसा
पानी
Arzoo Lakhnavi
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सब
राज
करना
चाहते
जिस
क़ल्ब
पर
उस
पर
सियासत
तो
हमारी
ही
रही
Hemant Sakunde
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चाँद
को
चाहना
मना
है
क्या
रात
में
डूबना
फ़ना
है
क्या
टूट
कर
गिर
गए
सितारे
गर
ढूँढ़
कोई
नया
बना
है
क्या
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Hemant Sakunde
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मुद्दत
से
हम
इक
वहम
पाला
करते
थे
हमको
लगा
था
सब
हमी
पे
मरते
थे
हम
शे'र
लिखते
रहते
थे
इक
हुस्न
पर
उनको
लगा
था
सिर्फ़
पन्ने
भरते
थे
तौसीफ़
उसकी
इतनी
करते
थे
कि
हम
ता'रीफ़
ख़ुद
की
भूलने
से
डरते
थे
वो
ज़ीनत-ए-महफ़िल
चुरा
ले
जाती
थी
हम
तालियाँ
ही
बस
समेटा
करते
थे
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Hemant Sakunde
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बस
इक
तलब
थी
उस
समय
इरशाद
की
कुछ
शे'र
हमको
भी
सुनाने
थे
उसे
Hemant Sakunde
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बाप
की
डाँट
भूल
जाता
हूँ
कहते
जब
आ
गले
लगाता
हूँ
कोई
दस्तक
भले
न
दे
लेकिन
दीप
मैं
रोज़
इक
जलाता
हूँ
खोजती
है
नज़र
किसे
तेरी
जब
भी
आवाज़
मैं
लगाता
हूँ
चाँद
है
आसमान
में
तो
क्या
मैं
सितारा
हूँ
टिमटिमाता
हूँ
इक
मुलाक़ात
याद
करके
मैं
इक
ग़ज़ल
रोज़
गुनगुनाता
हूँ
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Hemant Sakunde
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