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Hemant Sakunde
aarsi ke us taraf koi KHafaa tha
aarsi ke us taraf koi KHafaa tha | आरसी के उस तरफ़ कोई ख़फ़ा था
- Hemant Sakunde
आरसी
के
उस
तरफ़
कोई
ख़फ़ा
था
आज
आँखें
भी
न
मुझ
सेे
वो
मिलाता
- Hemant Sakunde
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तमाम
जिस्म
को
आँखें
बना
के
राह
तको
तमाम
खेल
मुहब्बत
में
इंतिज़ार
का
है
Munawwar Rana
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लाखों
सद
में
ढेरों
ग़म
फिर
भी
नहीं
हैं
आँखें
नम
इक
मुद्दत
से
रोए
नहीं
क्या
पत्थर
के
हो
गए
हम
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Azm Shakri
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एक
चेहरा
है
जो
आँखों
में
बसा
रहता
है
इक
तसव्वुर
है
जो
तन्हा
नहीं
होने
देता
Javed Naseemi
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तुम
तो
सर्दी
की
हसीं
धूप
का
चेहरा
हो
जिसे
देखते
रहते
हैं
दीवार
से
जाते
हुए
हम
Nomaan Shauque
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देखने
के
लिए
सारा
आलम
भी
कम
चाहने
के
लिए
एक
चेहरा
बहुत
Asad Badayuni
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एक
ही
बार
नज़र
पड़ती
है
उन
पर
‘ताबिश’
और
फिर
वो
ही
लगातार
नज़र
आते
हैं
Zubair Ali Tabish
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मुक़ाबिल
फ़ासलों
से
ही
मोहब्बत
डूब
जाएगी
सुनोगी
झूठी
बातें
तुम
हक़ीक़त
डूब
जाएगी
चलेगी
तब
तलक
जब
तक
तिरी
परछाईं
देखेगी
तिरा
जब
हुस्न
देखेगी
सियासत
डूब
जाएगी
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Anurag Pandey
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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हाए
उसके
हाथ
पीले
होने
का
ग़म
इतना
रोए
हैं
कि
आँखें
लाल
कर
ली
Harsh saxena
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मैं
हर
शख़्स
के
चेहरे
को
बस
इस
उम्मीद
से
तकता
हूँ
शायद
से
मुझको
दो
आँखें
तेरे
जैसी
दिख
जाएँ
Siddharth Saaz
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बाप
की
डाँट
भूल
जाता
हूँ
कहते
जब
आ
गले
लगाता
हूँ
कोई
दस्तक
भले
न
दे
लेकिन
दीप
मैं
रोज़
इक
जलाता
हूँ
खोजती
है
नज़र
किसे
तेरी
जब
भी
आवाज़
मैं
लगाता
हूँ
चाँद
है
आसमान
में
तो
क्या
मैं
सितारा
हूँ
टिमटिमाता
हूँ
इक
मुलाक़ात
याद
करके
मैं
इक
ग़ज़ल
रोज़
गुनगुनाता
हूँ
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Hemant Sakunde
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ऐ
ख़ुदा
कोई
नया
कर्तब
बता
दे
इस
पुराने
नाच
से
मन
उठ
गया
है
Hemant Sakunde
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उस
फूल
से
ख़ुशबू
चुरा
लूँ
मैं
अगर
दो
चार
काँटे
भी
चुभे
तो
डर
नहीं
Hemant Sakunde
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बस
इक
तलब
थी
उस
समय
इरशाद
की
कुछ
शे'र
हमको
भी
सुनाने
थे
उसे
Hemant Sakunde
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निज़ाम-ए-दहर
को
तो
अब
नहीं
हम
रोक
सकते
पर
तुझे
क्या
जल्दी
थी
इस
पुष्प
को
मुरझाने
की
मौला
Hemant Sakunde
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