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Hasan Raqim
KHud mujhko samajhne men mujhe umr lag gayi
KHud mujhko samajhne men mujhe umr lag gayi | ख़ुद मुझको समझने में मुझे उम्र लग गई
- Hasan Raqim
ख़ुद
मुझको
समझने
में
मुझे
उम्र
लग
गई
कैसे
मैं
तुम्हें
आऊँ
समझ
एक
बार
में?
- Hasan Raqim
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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मिल
गए
थे
एक
बार
उस
के
जो
मेरे
लब
से
लब
उम्र
भर
होंटों
पे
अपने
मैं
ज़बाँ
फेरा
किया
Jurat Qalandar Bakhsh
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उम्र-भर
के
सज्दों
से
मिल
नहीं
सकी
जन्नत
ख़ुल्द
से
निकलने
को
इक
गुनाह
काफ़ी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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उम्र
जो
बे-ख़ुदी
में
गुज़री
है
बस
वही
आगही
में
गुज़री
है
Gulzar Dehlvi
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इक
उम्र
कट
गई
है
तिरे
इंतिज़ार
में
ऐसे
भी
हैं
कि
कट
न
सकी
जिन
से
एक
रात
Firaq Gorakhpuri
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उम्र
ये
मेरी
सिर्फ़
लबादा
मेरे
खद
ओ
ख़ाल
का
है
मेरा
दिल
तो
मुश्किल
से
कुछ
सोलह
सतरह
साल
का
है!
Vishal Bagh
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अब
तो
ख़ुद
अपने
ख़ून
ने
भी
साफ़
कह
दिया
मैं
आपका
रहूॅंगा
मगर
उम्र
भर
नहीं
Aalok Shrivastav
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जो
नासमझ
हैं
उठाते
हैं
ज़िन्दगी
के
मज़े
समझने
वाले
तो
बस
उम्र
भर
समझते
हैं
Amit Bajaj
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भुलाने
में
जिसे
सारी
लगा
दी
उम्र
जो
मैने
उसी
के
नाम
पे
आकर
ये
मेरा
दिल
ठहरता
है
Kushal "PARINDA"
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काँटों
से
दिल
लगाओ
जो
ता-उम्र
साथ
दें
फूलों
का
क्या
जो
साँस
की
गर्मी
न
सह
सकें
Akhtar Shirani
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न
हाथ
आगे
करूँँ
सामने
सिवाए
तेरे
न
इतना
देना
कि
मुझको
ग़ुरूर
आ
जाए
Hasan Raqim
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तुम
सेे
मिले
बिना
भी
तुमको
याद
किया
जा
सकता
है
इश्क़
में
ख़ुदको
इस
तरहा
बर्बाद
किया
जा
सकता
है
दिल
में
छुपी
हज़ारों
बातें
तुम
सेे
बोली
जा
सकतीं
हैं
क़ैद
सभी,
जज़्बातों
को
आज़ाद
किया
जा
सकता
है
इश्क़
अगर
न
हो
मुझ
सेे
तो,
छोड़
के
जा
सकते
हो
तुम
या
इस
से
बेहतर
हल
भी
ईजाद
किया
जा
सकता
है
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Hasan Raqim
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मेरी
आँखों
में
बनकर
ख़्वाब
मुझको
आज़माती
हैं
तेरी
यादें
अभी
तक
रातों
की
नींदें
उड़ाती
हैं
वो
जिन
अलमारियों
में
मैं
तुम्हारी
यादें
रखता
था
उन्हीं
अलमारियों
में
अब
किताबें
धूल
खाती
हैं
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Hasan Raqim
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वो
मेरे
बाद
सभी
का
ही
हो
गया
देखो
मैं
जिसके
बाद
किसी
और
का
हुआ
ही
नहीं
Hasan Raqim
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कर
बैठे
हो
उस
दिल
में
भी
घर
तुमको
मुबारक
वो
शख़्स
था
तो
मेरा
मगर
तुमको
मुबारक
हम
जैसे
दरख़्तों
को
ज़मीं
आख़िरी
हद
है
तुम
बादलों
के
हो
तो
ये
पर
तुमको
मुबारक
टूटे
हुए
दिल
को
है
हराम
इसका
हर
एक
जाम
इस
इश्क़
की
बोतल
का
असर
तुमको
मुबारक
मेरी
गली
से
बस
हो
गुज़र
यार
का
मेरे
बाक़ी
के
जहाँ
भर
का
गुज़र
तुमको
मुबारक
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Hasan Raqim
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